Naxal Rehabilitation: छत्तीसगढ़ के बस्तर में हिंसा और बंदूकों का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों ने अब अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और बस्तर पुलिस की पहल के रंग लाने से 8 पूर्व नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल की 10वीं की परीक्षा न केवल दी, बल्कि शत-प्रतिशत परिणाम हासिल करते हुए सभी पास भी हो गए। इनमें से दो ने तो प्रथम श्रेणी (First Division) लाकर यह साबित कर दिया कि अगर मौका मिले, तो बदलाव किसी भी उम्र और परिस्थिति में संभव है। सफल होने वाले इन अभ्यर्थियों में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के पूर्व स्टेट कमेटी मेंबर भास्कर और महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की गीता नारोटे शामिल हैं। दोनों ने ही प्रथम श्रेणी हासिल की है।
कभी बंदूक से इलाज, अब नर्स बनने का सपना
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की रहने वाली 35 वर्षीय गीता नारोटे के लिए यह सफर आसान नहीं था। पारिवारिक तंगी और मुश्किल परिस्थितियों के चलते उन्होंने छठी कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद वे नक्सली संगठन में शामिल हो गईं और करीब दो दशक (20 साल) तक सक्रिय रहीं। संगठन में रहने के दौरान गीता घायल नक्सलियों का इलाज करती थीं। टांके लगाने, इंजेक्शन देने और दवाइयों की समझ होने के कारण उन्हें संगठन में 'नक्सली डॉक्टर गीता' के नाम से जाना जाने लगा। आत्मसमर्पण के बाद गीता ने अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करने की ठानी और 10वीं में फर्स्ट डिवीजन हासिल किया। अब गीता का लक्ष्य आगे की पढ़ाई पूरी कर एक पेशेवर नर्स बनना है, ताकि वे कानूनी और सम्मानजनक तरीके से समाज की सेवा कर सकें।
हथियार चलाने से बेहतर, किताबों से रास्ता बनाना
तेलंगाना के रहने वाले भास्कर 1990 के दशक में नक्सली संगठन से जुड़े थे। एक सामान्य कैडर से शुरुआत कर वे संगठन के शीर्ष पद दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के स्टेट कमेटी मेंबर तक पहुंचे। बस्तर के जंगलों में रहने के दौरान ही भास्कर ने हिंदी सीखी और धीरे-धीरे उनकी रुचि किताबों की तरफ बढ़ी। आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने अपनी इस रुचि को ही अपने पुनर्जन्म का जरिया बनाया। भास्कर ने कहा, "संगठन में रहते हुए हथियार चलाने का प्रशिक्षण लिया था, लेकिन अब समझ आया कि आगे बढ़ने का असली रास्ता किताबों से होकर जाता है।" भास्कर ने भी 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की है और वे अब आगे पढ़कर अपने समाज के विकास के लिए काम करना चाहते हैं।
बस्तर संभाग का शत-प्रतिशत परिणाम
बस्तर आईजी (IG) बद्रीनारायण मीणा ने इस सफलता पर खुशी जताते हुए बताया कि राज्य की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों की रुचि के हिसाब से उन्हें अलग-अलग ट्रेनिंग दी जा रही है। जिन लोगों ने पढ़ाई में रुचि दिखाई, पुलिस प्रशासन ने उन्हें छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल के जरिए परीक्षा में शामिल कराया।
परीक्षा में शामिल सभी 8 पूर्व नक्सली उत्तीर्ण रहे, जिनमें से:
बस्तर जिला: 6 परीक्षार्थी
कांकेर जिला: 1 परीक्षार्थी
बीजापुर जिला: 1 परीक्षार्थी
आगे की पढ़ाई और रोजगार में भी मदद करेगी पुलिस
आईजी मीणा ने आश्वस्त किया है कि जो पूर्व नक्सली आगे भी अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहते हैं, पुलिस विभाग उनके लिए हर संभव मदद मुहैया कराएगा। पुनर्वास नीति के तहत शिक्षा के साथ-साथ इन युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास लगातार जारी हैं। बंदूक छोड़कर कलम थामने वाले इन 8 पूर्व नक्सलियों की यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन में एक बड़ा मोड़ है, बल्कि बस्तर के अन्य दिग्भ्रमित युवाओं के लिए भी सामान्य और सम्मानजनक जीवन में लौटने का एक मजबूत संदेश है।

