शहर की जीवनदायिनी मानी जाने वाली सितली नाला अब धीरे-धीरे अपने पुराने प्राकृतिक स्वरूप में लौटने लगी है। मानसून की पहली बारिश ने इसकी सुंदरता में चार चांद लगा दिए हैं। स्वच्छ जलधारा और चारों ओर फैली हरियाली के कारण यह पूरा क्षेत्र अब एक रमणीय स्थल के रूप में विकसित होता नजर आ रहा है।
सितली नाला के सौंदर्यीकरण और समग्र विकास को गति देने के लिए यहां पुल निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है। आगामी दिनों में इसे एक प्रमुख पर्यटन, धार्मिक और मनोरंजन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके तहत भव्य मंदिर का निर्माण, आकर्षक एवं आधुनिक गार्डन, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण तथा हरित क्षेत्र का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
जनभागीदारी से संवरेगी शहर की धरोहर
स्वास्थ्य केंद्र समिति के तत्वावधान में इस महत्वाकांक्षी अभियान को जनसहयोग के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है। समिति ने महासमुंद के नागरिकों से इस पुनीत कार्य में तन, मन और धन से सहयोग करने की भावुक अपील की है, ताकि जनभागीदारी के माध्यम से सितली नाला का संरक्षण और विकास सफलतापूर्वक किया जा सके।
प्राकृतिक पहचान लौटाने का लिया गया संकल्प
समिति से जुड़े पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा तथा समिति के सचिव एवं नवनियुक्त एल्डरमैन मोहन साहू ने बताया कि वर्षों से उपेक्षित रहे सितली नाला को उसकी प्राकृतिक पहचान दिलाने का संकल्प लिया गया है। उनका कहना है कि उद्देश्य केवल नाले का विकास करना नहीं, बल्कि इसे शहर की सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यावरणीय धरोहर के रूप में स्थापित करना है।स्मृति को चिरस्थायी बनाने का मिलेगा अवसर
उन्होंने बताया कि जो नागरिक अपने स्वजनों या पूर्वजों की स्मृति को चिरस्थायी बनाना चाहते हैं, वे मंदिर निर्माण, गार्डन विकास अथवा वृक्षारोपण जैसे कार्यों में आर्थिक सहयोग प्रदान कर सकते हैं। इच्छुक नागरिक स्वास्थ्य केंद्र समिति के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत पाणिग्रही एवं अन्य पदाधिकारियों से संपर्क कर इस पुण्य कार्य के सहभागी बन सकते हैं।
आने वाली पीढ़ियों के लिए बनेगा मिसाल
समिति का दृढ़ विश्वास है कि जनभागीदारी से संचालित यह अभियान भविष्य में महासमुंद की नई पहचान बनेगा। हरियाली, स्वच्छ वातावरण और धार्मिक आस्था का यह अनूठा संगम न केवल शहर की सुंदरता बढ़ाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण सिद्ध होगा।