विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने पार्टी नेताओं और संभावित टिकट दावेदारों के लिए नए संगठनात्मक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के तहत अब पार्टी के किसी भी धरना-प्रदर्शन, आंदोलन, जनसंपर्क अभियान या राजनीतिक कार्यक्रम से पहले जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) और PCC को जानकारी देना जरूरी होगा।
कांग्रेस ने साफ किया है कि यह प्रक्रिया किसी नेता को अनुमति लेने के लिए बाध्य करने के लिए नहीं है, बल्कि संगठन के भीतर बेहतर तालमेल और समन्वय बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है। पार्टी चाहती है कि सभी राजनीतिक गतिविधियां संगठन की जानकारी और सहयोग से संचालित हों।
बिना जानकारी के कार्यक्रमों पर उठे सवाल
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय में कई नेताओं ने स्थानीय संगठन को भरोसे में लिए बिना अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए थे। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर समेत कई जिलों से इस तरह की शिकायतें प्रदेश नेतृत्व तक पहुंची थीं। कांग्रेस संगठन का मानना है कि जब नेता अपने स्तर पर अलग-अलग कार्यक्रम करते हैं तो कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है। इसके अलावा ऐसी गतिविधियां पार्टी के अंदर गुटबाजी को भी बढ़ावा दे सकती हैं। इसी को देखते हुए संगठन ने सभी नेताओं को एक व्यवस्था के तहत काम करने के निर्देश दिए हैं।
टिकट दावेदारों में बढ़ी बेचैनी
नए दिशा-निर्देशों के बाद विधानसभा चुनाव में टिकट की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं की चिंता बढ़ गई है। कुछ दावेदारों का मानना है कि कई बार स्थानीय मुद्दों पर तुरंत प्रतिक्रिया देना जरूरी होता है। ऐसे में पहले सूचना देने और संगठन से समन्वय की प्रक्रिया पूरी करने से आंदोलन या विरोध कार्यक्रमों में देरी हो सकती है। कुछ नेताओं को यह भी डर है कि संगठन के निर्देशों का पालन नहीं करने पर भविष्य में टिकट वितरण के दौरान इसका असर दिखाई दे सकता है। ऐसे में संभावित उम्मीदवार अब संगठन के साथ बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश में जुट गए हैं। कांग्रेस के अंदर लंबे समय से जिला कांग्रेस कमेटियों और विधायकों के बीच समन्वय की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। खासकर उन विधानसभा क्षेत्रों में यह स्थिति ज्यादा देखने को मिली है, जहां मौजूदा विधायक और टिकट के अन्य दावेदारों के बीच राजनीतिक गतिविधियों को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं।चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की कोशिश
प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कहना है कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य किसी नेता की सक्रियता को सीमित करना नहीं है। पार्टी का लक्ष्य विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को एकजुट, अनुशासित और मजबूत बनाना है। अब देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस के ये नए संगठनात्मक निर्देश जमीनी स्तर पर कितने प्रभावी साबित होते हैं। क्या इससे पार्टी के भीतर चल रही खींचतान कम होगी और चुनाव से पहले संगठन एकजुट होकर मैदान में उतर पाएगा, यह आने वाले समय में साफ होगा।
