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अफगान शरणार्थियों के लिए भारत की राहत सहायता
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भेजी बड़ी मदद : पाकिस्तान से खदेड़े जा रहे अफगान शरणार्थियों के लिए देवदूत बना भारत

पाकिस्तान से वापस भेजे जा रहे अफगान शरणार्थियों के संकट के बीच भारत ने मानवीय मदद के तौर पर अफगानिस्तान को टेंट की खेप भेजी है। इनका इस्तेमाल बेघर होकर लौट रहे परिवारों को अस्थायी आश्रय देने के लिए किया जाएगा।

कीर्तिमान न्यूज
14 Jul 2026, 08:58 AM
नई दिल्ली
पड़ोसी देश पाकिस्तान से जबरन निकाले जा रहे लाखों अफगान शरणार्थियों के संकट के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी 'वसुधैव कुटुंबकम' की नीति को दोहराया है। संकट की इस घड़ी में भारत ने अफगानिस्तान के लोगों की ओर मानवीय मदद का हाथ बढ़ाते हुए टेंट (तंबू) की एक बड़ी खेप भेजी है, ताकि अपने मुल्क लौट रहे बेघर परिवारों को तुरंत सिर छुपाने की जगह मिल सके। 
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मदद की आधिकारिक जानकारी साझा की है। मंत्रालय के मुताबिक, भारत सरकार ने अफगानिस्तान के 'शरणार्थी और पुनर्वास मंत्रालय' (MoRR) को ये टेंट सौंपे हैं। इस कदम का सीधा मकसद पाकिस्तान से खाली हाथ लौट रहे परिवारों का पुनर्वास करना और उन्हें बुनियादी सुविधाएं देना है।
बढ़ाया मदद का हाथ 

पाकिस्तान की सख्ती: 24 घंटे में 4 हजार लोगों को सीमा पार धकेला

दरअसल, इस समय अफगानिस्तान एक अभूतपूर्व मानवीय संकट से जूझ रहा है, क्योंकि पाकिस्तान ने अपने देश में रह रहे बिना वैध दस्तावेजों वाले अफगान प्रवासियों को बाहर निकालने का अभियान तेज कर दिया है।

  • अल्टीमेटम खत्म, कार्रवाई शुरू: रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने अवैध रूप से रह रहे अफगानों को 10 जुलाई तक खुद देश छोड़ने का समय दिया था। यह समयसीमा खत्म होते ही पाकिस्तानी प्रशासन ने धरपकड़ और डिपोर्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • सड़कों पर आए परिवार: अफगान मीडिया आउटलेट 'अमू टीवी' के अनुसार, तालिबान के 'हाई कमीशन फॉर एड्रेसिंग रिटर्नीज इश्यूज' ने बताया कि बीते वीकेंड पर महज 24 घंटे के भीतर 4,000 से ज्यादा अफगानों को पाकिस्तान से वापस खदेड़ दिया गया।

नागरिकों को देश छोड़ने का हुक्म 

पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लांडी कोटल स्थित 'हमजा बाबा ट्रांजिट पॉइंट' पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची है। अधिकारियों का कहना है कि जब से पाकिस्तान ने सभी अवैध अफगान नागरिकों को देश छोड़ने का हुक्म सुनाया है, तब से सीमा पार करने वाले लोगों की तादाद में भारी उछाल आया है। अब हर रोज 10,000 से ज्यादा शरणार्थी भुखमरी और अनिश्चितता के बीच अफगानिस्तान लौट रहे हैं। 

फैसले पर उठाए सवाल 

पाकिस्तान के इस कड़े रुख पर संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। 'डॉन' से बातचीत में UNHCR के प्रवक्ता कैसर खान अफरीदी ने पाकिस्तान सरकार के इस 'जबरन' निष्कासन के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
"UNHCR को सबसे ज्यादा फिक्र उन महिलाओं और बच्चियों की है, जिन्हें जबरन एक ऐसे देश में भेजा जा रहा है जहाँ उनके बुनियादी मानवाधिकार और आजादी पूरी तरह खतरे में हैं। इसके अलावा कई ऐसे समूह भी हैं, जिनकी जान को अफगानिस्तान लौटते ही खतरा हो सकता है।" - कैसर खान अफरीदी, प्रवक्ता (UNHCR)

भारत बना बड़ा सहारा 

संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान सरकार से भावुक अपील करते हुए कहा है कि इंसानी गरिमा को ताक पर न रखा जाए। अफगानों की यह वापसी पूरी तरह स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से होनी चाहिए, न कि दबाव में। ऐसे माहौल में भारत द्वारा भेजी गई सहायता इन बेघर हो रहे लोगों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो रही है।
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