जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले को एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जो चार्जशीट दाखिल की है, उसने सरहद पार बैठे आतंकियों के आकाओं की रातों की नींद उड़ा दी है। 22 अप्रैल 2025 को बेसरन घाटी में निर्दोष पर्यटकों पर हुए उस कायरतापूर्ण हमले की परतें अब पूरी तरह खुल चुकी हैं।
NIA द्वारा अदालत में पेश की गई 1,597 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके मुखौटा संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) की उस खौफनाक साजिश का रोंगटे खड़े कर देने वाला कच्चा चिट्ठा सामने आया है, जिसे पूरी तरह डिजिटल और हाई-टेक तरीके से अंजाम दिया गया था।
10 लाख का इनामी 'लंगड़ा' निकला मास्टरमाइंड, लाहौर से दे रहा था निर्देश
NIA की जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि पूरे हमले का मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ है।
कौन है साजिद जट्ट: यह मूल रूप से पाकिस्तान के कसूर इलाके का रहने वाला है। मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगने के बाद इसे नकली पैर लगाया गया था, जिसके बाद से इसे आतंकी हलकों में ‘लंगड़ा’ कहा जाता है।
कश्मीर में पुराना नेटवर्क: साजिद जट्ट साल 2005 में भारत में अवैध तरीके से घुसा था और उसने दक्षिण कश्मीर में लश्कर का एक मजबूत स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार किया था।
लाहौर से लाइव कंट्रोल: वह फिलहाल पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर सुरक्षित पनाहगाह से आतंकियों को रीयल-टाइम निर्देश दे रहा था। भारत सरकार उसे पहले ही UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत खूंखार आतंकी घोषित कर चुकी है और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम है।
टाइमलाइन: कैसे रची गई 26 बेगुनाहों के कत्लेआम की साजिश?
NIA की फॉरेंसिक और डिजिटल जांच से हमले की पूरी क्रोनोलॉजी सामने आई है:
15-16 अप्रैल 2025 (आदेश): पाकिस्तान से आतंकियों को सीधे बेसरन घाटी पहुंचने के अंतिम आदेश जारी हुए। आतंकियों के पास घाटी के भूगोल और रास्तों की पहले से ही पूरी जानकारी थी।
रीयल-टाइम ट्रैकिंग: आतंकियों को आगे बढ़ने के रास्ते और टारगेट की लाइव लोकेशन पाकिस्तान से भेजी जा रही थी। इसके लिए पाकिस्तान में खरीदे गए मोबाइल फोन और हाई-लेवल एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किया गया।
22 अप्रैल 2025, दोपहर 2:23 बजे (हमला): तीन पाकिस्तानी आतंकी सैन्य वर्दी में बेसरन घाटी पहुंचे। हमला करने से ठीक पहले वे एक पेड़ के नीचे बैठकर खाना खा रहे थे और सही मौके का इंतजार कर रहे थे। दोपहर ठीक 2:23 बजे उन्होंने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस बर्बर हमले में 26 लोगों की जान गई, जिनमें से अधिकांश देश के अलग-अलग हिस्सों से आए पर्यटक थे।
हाई-टेक थे आतंकी: हमलावर न सिर्फ AK-47 और अत्याधुनिक M4 कार्बाइन जैसे घातक हथियारों से लैस थे, बल्कि उनके पास हाई-फ्रीक्वेंसी कम्युनिकेशन डिवाइस भी थे। अपनी इस बर्बरता को रिकॉर्ड करने और पाकिस्तान में बैठे आकाओं को सबूत देने के लिए आतंकियों ने GoPro कैमरों का भी इस्तेमाल किया था।
'डिजिटल फॉरेंसिक' से बेनकाब हुआ पाकिस्तान का 'कश्मीर फाइट' प्रोपेगैंडा
हमले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने के लिए पाकिस्तान ने हमेशा की तरह पैंतरा बदला था, लेकिन NIA की वैज्ञानिक जांच के आगे उसकी एक न चली:
टेलीग्राम चैनल से कबूलनामा: हमले के तुरंत बाद TRF ने ‘कश्मीर फाइट’ नाम के टेलीग्राम चैनल पर इस खूनी खेल की जिम्मेदारी ली थी।
हैक होने का झूठा दावा: जब वैश्विक स्तर पर इस हमले की थू-थू होने लगी, तो आतंकियों ने नया नैरेटिव गढ़ते हुए दावा किया कि उनका टेलीग्राम अकाउंट हैक हो गया था।
NIA ने पकड़ी चोरी: जांच एजेंसी ने डिजिटल ट्रेल, आईपी एड्रेस (IP Address) और साइबर फॉरेंसिक की मदद से यह साबित कर दिया कि वह टेलीग्राम चैनल सीधे तौर पर पाकिस्तान की जमीन से ही ऑपरेट किया जा रहा था।
स्थानीय मददगारों (OGW) और ड्रोन सप्लाई पर कड़ा शिकंजा
NIA की चार्जशीट से यह भी साफ है कि इस हमले को बिना स्थानीय मदद के अंजाम नहीं दिया जा सकता था।
घाटी में सक्रिय ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) ने आतंकियों को पनाह दी, रसद पहुंचाई और रेकी करने में मदद की।
जांच में इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि हमले में इस्तेमाल हथियार और फंडिंग के लिए ड्रग्स की खेप सीमा पार से ड्रोन के जरिए भारतीय इलाके में गिराई गई थी।
एनआईए ने कोर्ट में आतंकियों और उनके हैंडलर्स के वॉयस सैंपल (आवाज के नमूने), कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR), डिलीट किए गए मोबाइल डेटा और पुख्ता डिजिटल सबूत पेश किए हैं, जिससे आरोपियों का बचना नामुमकिन है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि NIA की इस बेहद मजबूत चार्जशीट के बाद अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को टेरर फंडिंग और आतंकी साजिशों के मुद्दे पर एक बार फिर घेरने में भारत को बड़ी कामयाबी मिलेगी।
