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हाई कोर्ट का फैसला
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ब्लास्ट केस : अहमदाबाद ब्लास्ट केस में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 38 दोषियों को राहत नहीं

गुजरात हाई कोर्ट ने 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखा है। सेशंस कोर्ट के 2022 के फैसले के खिलाफ दायर राज्य सरकार की कन्फर्मेशन याचिका और दोषियों की अपीलों पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया।

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प्रकाशित: 07 Jul 2026, 01:59 PM · अपडेट: 16 Oct 2026, 01:55 AM
अहमदाबाद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में 38 दोषियों को सुनाई गई मौत की सजा को बरकरार रखा है। यह फैसला राज्य सरकार की कन्फर्मेशन याचिका और दोषियों की अपीलों पर सुनवाई के बाद आया है। 

अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट ने 18 फरवरी 2022 को इस मामले में 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इनमें 38 दोषियों को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वहीं, सबूतों के अभाव में 29 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। अब गुजरात हाई कोर्ट ने मौत की सजा पर अपनी मुहर लगा दी है।

13 साल चली कानूनी प्रक्रिया

इस मामले में कुल 78 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला था। वर्ष 2009 में शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया करीब 13 साल तक चली। लंबी सुनवाई और सैकड़ों गवाहों के बाद सेशंस कोर्ट ने 2022 में फैसला सुनाया था। यह देश के सबसे बड़े आतंकी मामलों में से एक माना जाता है।

क्यों आया हाई कोर्ट का फैसला

सेशंस कोर्ट से फांसी की सजा मिलने के बाद राज्य सरकार ने सजा की पुष्टि के लिए गुजरात हाई कोर्ट में कन्फर्मेशन याचिका दाखिल की थी। दूसरी ओर, दोषी ठहराए गए 48 आरोपियों ने भी अपनी सजा को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने 38 दोषियों की मौत की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया। 

2008 में हुए थे सिलसिलेवार धमाके

वर्ष 2008 में अहमदाबाद के अलग-अलग इलाकों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में कई लोगों की जान गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। घटना के बाद देशभर में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया था। हाई कोर्ट के इस फैसले को इस चर्चित मामले में अहम कानूनी पड़ाव माना जा रहा है।

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