दुर्ग जिले के जामुल क्षेत्र के ग्राम खेरधा में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के प्रस्तावित बायो CNG प्लांट को लेकर विवाद गहरा गया है। शुक्रवार को जिला प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल और तीन जेसीबी मशीनों के साथ प्लांट की बाउंड्री वॉल के लिए खुदाई शुरू कराने पहुंची।
प्रशासन का दावा था कि यह कार्रवाई सभी आवश्यक आदेशों के अनुरूप की जा रही है, लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी गांव के लोगों को मिली, बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन तेज हो गया और ग्रामीणों ने निर्माण कार्य रुकवा दिया। स्थिति को देखते हुए प्रशासन को जेसीबी मशीनों का काम तत्काल बंद कराना पड़ा। कुछ समय के लिए मौके पर तनावपूर्ण माहौल बना रहा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
बिना पंचायत मंजूरी शुरू हुआ निर्माण
प्रस्तावित बायो CNG प्लांट का मुद्दा पहले भी कई बार चर्चा में रह चुका है, लेकिन शुक्रवार को यह विवाद फिर से गरमा गया। प्रशासन का कहना है कि कलेक्टर और न्यायालय के निर्देशों के आधार पर सीमांकन और निर्माण संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। दूसरी ओर, ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ग्राम पंचायत के प्रस्ताव, बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और स्थानीय लोगों की सहमति के निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है। विरोध का नेतृत्व कर रहे ग्राम सरपंच ने कहा कि किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट से पहले ग्राम सभा की सहमति आवश्यक होती है, लेकिन इस मामले में ग्रामीणों की राय को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
चारागाह भूमि पर प्लांट का विरोध
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जमीन पर बायो CNG प्लांट प्रस्तावित है, वह गांव की सामूहिक चारागाह भूमि है। उनका कहना है कि इस भूमि का उपयोग वर्षों से ग्रामीणों के पशुओं के चरने के लिए किया जाता रहा है। यदि यहां प्लांट का निर्माण किया जाता है, तो गांव के पशुपालकों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि चारागाह भूमि को किसी भी औद्योगिक परियोजना के लिए उपयोग में न लाया जाए और इसके संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। इसी मुद्दे को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली।कचरे और प्रदूषण का डर
विरोध कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि बायो CNG प्लांट शुरू होने के बाद शहर का जैविक कचरा और अन्य अपशिष्ट गांव में लाया जाएगा। उनका दावा है कि इससे पूरे इलाके में बदबू फैलेगी, पर्यावरण प्रदूषित होगा और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ेगा। ग्रामीणों को आशंका है कि कचरे के परिवहन से गांव की सड़कों पर भी दबाव बढ़ेगा और आसपास रहने वाले लोगों का जीवन प्रभावित होगा। इन संभावित समस्याओं को देखते हुए ग्रामीणों ने जेसीबी मशीनों का काम बंद करा दिया और निर्माण कार्य पूरी तरह रोक दिया।
प्रशासन-ग्रामीणों में आमने-सामने
निर्माण कार्य रुकने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने भरोसा दिलाने की कोशिश की कि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। उनका कहना है कि जब तक ग्राम पंचायत की अनुमति, पर्यावरणीय सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर स्पष्ट जानकारी और चारागाह भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा। फिलहाल मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है और पूरे क्षेत्र में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।विरोध से निर्माण कार्य ठप
ग्रामीणों के तीव्र विरोध के चलते फिलहाल बायो CNG प्लांट की बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य रोक दिया गया है। प्रशासन और ग्रामीणों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण मामला फिलहाल अधर में है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में प्रशासन और ग्रामीणों के बीच होने वाली बातचीत का क्या परिणाम निकलता है। यदि दोनों पक्षों के बीच समाधान नहीं निकलता है, तो यह विवाद और भी गहरा सकता है। फिलहाल खेरधा गांव में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बनी हुई है।