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भारत में बढ़ रहा नेक कैंसर, ये 4 लक्षण हो सकते हैं खतरा
भारत में बढ़ रहा नेक कैंसर, ये 4 लक्षण हो सकते हैं खतरा
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कैंसर : भारत में बढ़े हेड एंड नेक कैंसर के मामले, देर से पहचान बन रही खतरा

भारत में हेड एंड नेक कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार लगातार गला दर्द, गर्दन में गांठ, मुंह के लंबे समय तक रहने वाले छाले और निगलने में परेशानी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने तंबाकू, गुटखा, शराब और खराब लाइफस्टाइल को बड़ा कारण बताते हुए समय पर जांच और जागरूकता पर जोर दिया है।

कीर्तिमान नेटवर्क
23 May 2026, 11:51 AM
नई दिल्ली
भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच अब हेड एंड नेक कैंसर यानी सिर और गर्दन से जुड़े कैंसर को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में इस बीमारी के मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब 30 से 50 वर्ष की उम्र के युवा भी बड़ी संख्या में इसकी चपेट में आ रहे हैं।  तंबाकू, गुटखा, धूम्रपान, शराब, खराब लाइफस्टाइल, प्रदूषण और HPV संक्रमण जैसे कारण इस बीमारी को तेजी से बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। कई शोध रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां ओरल और हेड एंड नेक कैंसर के मामले सबसे अधिक पाए जाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक भारत में कुल कैंसर मामलों का बड़ा हिस्सा हेड एंड नेक कैंसर से जुड़ा हुआ है। चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि अधिकतर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है। शुरुआती लक्षण सामान्य गले के संक्रमण, सर्दी-जुकाम या मुंह की समस्या जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर स्थिति पैदा कर देती है।

हेड एंड नेक कैंसर

हेड एंड नेक कैंसर एक ऐसा कैंसर है जो मुंह, जीभ, गले, स्वरयंत्र, नाक, साइनस और गर्दन के आसपास के हिस्सों में विकसित होता है। इसमें ओरल कैंसर सबसे आम माना जाता है। भारत में खासकर तंबाकू और सुपारी सेवन करने वालों में इसके मामले अधिक देखे जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय पर पहचान हो जाए तो इसका इलाज संभव है, लेकिन देर होने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

केवल गला दर्द नहीं, ये 4 लक्षण भी हो सकते हैं कैंसर

हेड एंड नेक कैंसर के कई ऐसे संकेत हैं जिन्हें लोग सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

गला दर्द या आवाज बैठना

अगर कई हफ्तों तक गले में दर्द बना रहे, आवाज भारी हो जाए या बोलने में परेशानी होने लगे तो इसे सामान्य संक्रमण मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक यह गले या स्वरयंत्र के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है। कई मरीजों में लगातार खांसी और गले में जलन जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।

गर्दन में गांठ या सूजन

गर्दन में किसी तरह की गांठ, सूजन या लिम्फ नोड्स का लगातार बढ़ना भी गंभीर संकेत माना जाता है। शुरुआत में यह दर्दरहित हो सकता है, इसलिए लोग इसे सामान्य सूजन समझ लेते हैं। लेकिन लंबे समय तक बनी रहने वाली गांठ कैंसर के फैलने का संकेत हो सकती है।

मुंह में लंबे समय तक रहने वाले छाले

अगर मुंह के छाले लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहे हैं, मसूड़ों से खून आ रहा है या मुंह के अंदर सफेद और लाल धब्बे दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में ओरल कैंसर के अधिकांश मामले गुटखा, तंबाकू और सुपारी के सेवन से जुड़े पाए गए हैं। लगातार तंबाकू सेवन मुंह की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और धीरे-धीरे कैंसर का खतरा बढ़ा देता है।

निगलने में परेशानी और कान में दर्द

खाना निगलने में तकलीफ, गले में कुछ फंसा हुआ महसूस होना, लगातार कान दर्द या बोलने में परेशानी भी हेड एंड नेक कैंसर के संकेत हो सकते हैं। कई बार मरीज इन लक्षणों को सामान्य संक्रमण समझकर महीनों तक इलाज नहीं कराते, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।

भारत में बढ़ रहे कैंसर

भारत में हेड एंड नेक कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे सबसे बड़ा कारण तंबाकू और गुटखा सेवन है। देश में बड़ी संख्या में लोग धूम्रपान और स्मोकलेस टोबैको का सेवन करते हैं। इसके अलावा शराब, खराब खानपान, फास्ट फूड, नींद की कमी और तनाव जैसी आधुनिक जीवनशैली भी जोखिम बढ़ा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि अब युवाओं में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां यह बीमारी मुख्य रूप से बुजुर्गों में ज्यादा देखी जाती थी, वहीं अब कॉलेज और ऑफिस जाने वाले युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। कई मामलों में HPV संक्रमण को भी बड़ा कारण माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदूषण और खराब ओरल हाइजीन भी इस बीमारी को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं

पहचान से बच सकती है जान

डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती स्टेज में पहचान होने पर हेड एंड नेक कैंसर का इलाज काफी हद तक सफल हो सकता है। सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और आधुनिक टारगेटेड थेरेपी के जरिए मरीजों का इलाज किया जा रहा है। लेकिन इसके लिए समय पर जांच और जागरूकता बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ लोगों को तंबाकू और गुटखा छोड़ने, शराब से दूरी बनाने, संतुलित भोजन करने और नियमित हेल्थ चेकअप कराने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही मुंह, गले या गर्दन में किसी भी असामान्य बदलाव को हल्के में न लेने की चेतावनी दी जा रही है। डॉक्टरों का मानना है कि जागरूकता और शुरुआती पहचान ही इस खतरनाक बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
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