फेफड़ों का कैंसर (लंग कैंसर) आज दुनिया भर में सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार हर वर्ष लाखों लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं और बड़ी संख्या में मरीजों की मृत्यु भी इसी कारण होती है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि लंग कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती इसकी देर से पहचान है। अधिकांश मामलों में बीमारी का पता तब चलता है जब कैंसर काफी फैल चुका होता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानने और समय पर जांच कराने पर जोर दे रहे हैं। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में कैंसर के इलाज के कई प्रभावी विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन उनकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि बीमारी का पता कितनी जल्दी चलता है। यदि शुरुआती चरण में लंग कैंसर का निदान हो जाए तो मरीज के ठीक होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
तेजी से बढ़ रहे लंग कैंसर
लंग कैंसर दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है। चिकित्सा शोध बताते हैं कि पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं में भी इसके मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। बदलती जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण, धूम्रपान की आदत और औद्योगिक रसायनों के संपर्क को इसके पीछे प्रमुख कारण माना जाता है। भारत में भी फेफड़ों के कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण और तंबाकू सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा रही है।
शुरुआती चरण में नहीं दिखते संकेत
लंग कैंसर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती अवस्था में इसके लक्षण बहुत सामान्य या लगभग न के बराबर होते हैं। कई मरीजों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चलता कि उनके फेफड़ों में कैंसर विकसित हो रहा है। जब तक लक्षण स्पष्ट रूप से सामने आते हैं, तब तक कई मामलों में बीमारी दूसरे अंगों तक फैल चुकी होती है। यही वजह है कि डॉक्टर लगातार बनी रहने वाली खांसी, सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द जैसे संकेतों को गंभीरता से लेने की सलाह देते हैं।
लंग कैंसर के प्रमुख लक्षण :-
खांसी के साथ खून आना
यदि खांसी के साथ खून आने लगे तो यह गंभीर चेतावनी संकेत हो सकता है। हालांकि इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
लगातार खांसी
यदि तीन सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी बनी रहे और सामान्य दवाओं से भी आराम न मिले, तो इसकी जांच कराना जरूरी है।
सांस लेने में तकलीफ
फेफड़ों में ट्यूमर विकसित होने पर वायु मार्ग प्रभावित हो सकते हैं, जिससे सांस फूलना, सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई या मामूली काम के बाद भी थकान महसूस हो सकती है।
वजन कम होना
अचानक और तेजी से वजन घटना शरीर में किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। कैंसर कोशिकाएं शरीर की ऊर्जा को प्रभावित करती हैं, जिससे वजन कम होने लगता है।
लगातार कमजोरी और थकान
यदि पर्याप्त आराम के बाद भी थकान बनी रहती है और व्यक्ति खुद को कमजोर महसूस करता है, तो यह भी लंग कैंसर का संकेत हो सकता है।
सीने में दर्द
खांसते समय, हंसते समय या गहरी सांस लेने पर सीने में दर्द महसूस होना फेफड़ों से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
बार-बार फेफड़ों का संक्रमण
निमोनिया, ब्रोंकाइटिस या अन्य श्वसन संक्रमण बार-बार होना भी फेफड़ों में किसी गंभीर समस्या की ओर संकेत कर सकता है।
धूम्रपान सबसे बड़ा कारण
लंग कैंसर के लगभग 80 से 90 प्रतिशत मामलों का संबंध प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से धूम्रपान से होता है। सिगरेट, बीड़ी, सिगार और अन्य तंबाकू उत्पादों में मौजूद हजारों हानिकारक रसायन फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। चिंता की बात यह है कि केवल धूम्रपान करने वाले ही नहीं, बल्कि सेकेंड हैंड स्मोक यानी दूसरों के धुएं के संपर्क में रहने वाले लोगों में भी इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
वायु प्रदूषण भी बन रहा खतरा
हाल के वर्षों में कई वैज्ञानिक अध्ययनों ने यह संकेत दिया है कि वायु प्रदूषण भी फेफड़ों के कैंसर का एक महत्वपूर्ण कारण बनता जा रहा है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक प्रदूषण और सूक्ष्म कण (PM2.5) फेफड़ों को लगातार नुकसान पहुंचा सकते हैं। महानगरों और औद्योगिक क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपनी श्वसन स्वास्थ्य की नियमित जांच करानी चाहिए।
आनुवंशिक और पेशागत कारण
कुछ लोगों में लंग कैंसर का खतरा आनुवंशिक कारणों से भी बढ़ सकता है। यदि परिवार में किसी सदस्य को फेफड़ों का कैंसर रहा हो तो जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।इसके अलावा एस्बेस्टस, आर्सेनिक, रेडॉन गैस और अन्य औद्योगिक रसायनों के संपर्क में रहने वाले लोगों में भी लंग कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
समय पर जांच
चिकित्सकों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति में लंबे समय तक खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द या वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जांच करानी चाहिए।आज सीटी स्कैन, लो-डोज सीटी स्कैन, एक्स-रे, ब्रोंकोस्कोपी और बायोप्सी जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से बीमारी का पता शुरुआती चरण में लगाया जा सकता है। विशेष रूप से लंबे समय से धूम्रपान करने वाले लोगों के लिए नियमित स्क्रीनिंग बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इलाज के आधुनिक विकल्प
पिछले कुछ वर्षों में लंग कैंसर के इलाज में काफी प्रगति हुई है। सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक उपचार पद्धतियां मरीजों की जीवन प्रत्याशा और गुणवत्ता में सुधार कर रही हैं। शुरुआती चरण में पकड़े गए कैंसर के मामलों में उपचार की सफलता दर काफी अधिक होती है।
