मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत बस्तर संभाग के नगरीय निकाय क्षेत्रों में संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) की व्यवस्था को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री मोहन मरकाम ने सरकार पर निशाना साधा है। गुरुवार को जगदलपुर पहुंचे पूर्व मंत्री मोहन मरकाम ने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद मोबाइल मेडिकल यूनिट की बसों का रंग और तस्वीरें जरूर बदल दी गईं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी मूल समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी और जरूरी संसाधनों का अभाव मरीजों की परेशानी बढ़ा रहा है।
2020 में शुरू हुई थी योजना
मोहन मरकाम ने कहा कि वर्ष 2020 में तत्कालीन भूपेश सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लोगों तक मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से प्रदेश के कई जिलों से मोबाइल मेडिकल यूनिट की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। इनमें दवाओं की कमी, जांच सुविधाओं का अभाव और अन्य संसाधनों की कमी जैसी समस्याएं शामिल हैं।
भुगतान जारी निरीक्षण नहीं होने का लगाया आरोप
मोहन मरकाम ने आरोप लगाया कि सरकार संबंधित कंपनी को हर महीने भुगतान कर रही है, लेकिन जहां से शिकायतें मिल रही हैं वहां नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से सरकारी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने मांग की कि मोबाइल मेडिकल यूनिट की सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार को जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ानी चाहिए, ताकि जरूरतमंद लोगों को सही समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।
CBC मशीन खराब होने का दावा
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर मोबाइल मेडिकल यूनिट में जांच से जुड़ी मशीनें खराब पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय इन यूनिट में 42 प्रकार के पैथोलॉजी टेस्ट की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन अब कई स्थानों पर मरीजों को पूरी जांच सुविधा नहीं मिल पा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि संबंधित कंपनी की कार्यप्रणाली की जांच कर लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाए।