"है बड़ा कोई अवगुण उसमें, जिसे कोई हुनर आवे। काश मेरे पास लोगों और संस्थाओं की असुरक्षाओं के लिए कोई एंटीडोट (इलाज) होता। इसके बावजूद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मुझे पिछले 45 वर्षों में बहुत कुछ दिया है और मैंने भी अपने पूरे वयस्क जीवन को दशकों तक पार्टी की सेवा में समर्पित किया है।"
तिवारी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए दार्शनिक अंदाज में यह भी जोड़ा कि "जो होना है, वह होकर रहेगा।" राजनीति के जानकारों का मानना है कि तिवारी का यह बयान सीधे तौर पर पार्टी आलाकमान और पंजाब के उन स्थानीय नेताओं पर निशाना है जो असुरक्षा की भावना के चलते वरिष्ठ नेताओं को आगे बढ़ने से रोकते हैं।
किए गए बड़े बदलाव
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अपनी प्रदेश इकाई के ढांचे में बड़ा बदलाव किया। काफी समय से कयास लगाए जा रहे थे कि पंजाब नेतृत्व में फेरबदल हो सकता है, लेकिन पार्टी ने साफ कर दिया कि:
अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे।
प्रताप सिंह बाजवा विधानसभा में विधायक दल के नेता (LoP) की कमान संभालते रहेंगे।
चरणजीत पर खेला बड़ा दांव
इन दोनों शीर्ष नेताओं को बरकरार रखते हुए पार्टी ने चुनावी समितियों का ऐलान किया, जिसमें कई दिग्गजों को जगह मिली, लेकिन मनीष तिवारी का नाम सूची से पूरी तरह गायब रहा। इस नए पुनर्गठन में कांग्रेस ने पंजाब के अपने सबसे बड़े दलित चेहरे और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर बड़ा दांव खेला है। चन्नी को आगामी चुनाव के लिए चुनाव अभियान समिति (Campaign Committee) का प्रमुख नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा अन्य अहम जिम्मेदारियां इस प्रकार बांटी गई हैं:
| नेता का नाम | सौंपी गई नई जिम्मेदारी / समिति |
| सुखजिंदर सिंह रंधावा (सांसद) | कोर कमेटी का जिम्मा |
| विजय इंदर सिंघला (पूर्व मंत्री) | चुनाव प्रबंधन और समन्वय समिति के अध्यक्ष |
| डॉ. अमर सिंह (सांसद) | घोषणापत्र (Manifesto) समिति के अध्यक्ष |