शासकीय आशीबाई गोलछा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महासमुंद की छात्रा रागनी साहू ने अंतर्राष्ट्रीय चंद्र मिशन शक्तिसैट में नेशनल फाइनलिस्ट के रूप में चयनित होकर जिले का नाम देशभर में रोशन किया है। इस प्रतिष्ठित मिशन के लिए चयनित होने वाली रागनी साहू महासमुंद जिले के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ की एकमात्र छात्रा हैं। उनकी इस उपलब्धि से जिले के शिक्षा जगत में खुशी और गर्व का माहौल है। रागनी ने अपनी मेहनत, लगन और वैज्ञानिक सोच के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी खास पहचान बनाई है
मार्गदर्शन की हुई प्रशंसा
कलेक्टर ने शासकीय आशीबाई गोलछा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य जी.आर. सिन्हा और अटल टिंकरिंग लैब के प्रभारी एवं भौतिकी व्याख्याता चंद्रशेखर मिथलेश के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के बेहतर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और लगातार प्रोत्साहन से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। रागनी की सफलता में विद्यालय के शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
शिक्षा अधिकारियों ने दी बधाई
रागनी साहू की उपलब्धि पर जिला शिक्षा अधिकारी बी.एल. देवांगन और जिला मिशन समन्वयक रेखराज शर्मा ने भी उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि रागनी ने अपनी मेहनत और लगन से न केवल अपने विद्यालय बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रागनी की सफलता से जिले के अन्य विद्यार्थी भी प्रेरित होंगे और विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेंगे।कलेक्टर ने बढ़ाया हौसला
रागनी साहू की इस सफलता पर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने उन्हें बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि छात्रा की प्रतिभा, कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। कलेक्टर ने कहा कि रागनी ने अपनी मेहनत से जिले को गौरवान्वित किया है। उन्होंने विद्यालय द्वारा दिए गए गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और प्रोत्साहन की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी उपलब्धियां अन्य विद्यार्थियों को भी विज्ञान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
चुनौतीपूर्ण चयन में मिली जीत
अंतर्राष्ट्रीय चंद्र मिशन शक्तिसैट के लिए देशभर से प्रतिभावान विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद केवल 20 विद्यार्थियों को नेशनल फाइनलिस्ट के रूप में चुना गया है। रागनी साहू ने राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन और साक्षात्कार में शानदार प्रदर्शन करते हुए इस प्रतिष्ठित सूची में अपना स्थान बनाया। उनकी वैज्ञानिक समझ, सीखने की क्षमता और नवाचार के प्रति रुचि ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। रागनी साहू ने वर्ष 2025 में अपने विद्यालय की अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से शक्तिसैट मिशन के लिए पंजीयन कराया था। इसके बाद उन्होंने चयन प्रक्रिया के तहत लगभग 120 घंटे की ऑनलाइन प्रशिक्षण श्रृंखला पूरी की।वैश्विक स्तर पर मिशन की भागीदारी
अंतर्राष्ट्रीय चंद्र मिशन शक्तिसैट में भारत के अलावा अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस सहित दुनिया के 108 देशों के विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। इस मिशन का उद्देश्य विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। मिशन के तहत विद्यार्थियों द्वारा दो चंद्र उपग्रह विकसित किए जाएंगे। इनमें से एक उपग्रह चंद्रमा की कक्षा में स्थापित होकर उसकी परिक्रमा करेगा, जबकि दूसरा रोवर चंद्रमा की सतह पर उतरकर वैज्ञानिक प्रयोग करेगा।