वन अधिकार अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए जिले में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में एफआरए सेल के एमआईएस सहायक लिलेश साहू ने गुरुवार को विकासखंड खल्लारी के ग्राम खल्लारी पहुंचकर सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति के सदस्यों से मुलाकात की। बैठक के दौरान साहू ने समिति के सदस्यों को सामुदायिक वन संसाधन क्षेत्र के प्रभावी प्रबंधन, मृदा संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित जानकारी दी।
संसाधन संरक्षण पर जोर
उन्होंने बताया कि वन क्षेत्रों की सुरक्षा और विकास के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सामुदायिक वन संसाधनों का सही उपयोग और संरक्षण करने से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके लिए नियमित रूप से वृक्षारोपण, जल एवं मृदा संरक्षण के कार्यों को बढ़ावा देना आवश्यक है।
सहभागिता से होगा वन संरक्षण
साहू ने बताया कि सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण में ग्राम सभा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ग्राम सभा और समिति के सदस्य मिलकर वन क्षेत्रों की सुरक्षा, विकास और सतत प्रबंधन के लिए बेहतर कार्य कर सकते हैं।
इस दौरान समिति के नाम से बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया और उसके महत्व की भी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि समिति के माध्यम से योजनाबद्ध तरीके से वन संरक्षण से जुड़े कार्यों को आसानी से संचालित किया जा सकता है।
मिलेगी 50 हजार रुपए की सहायता
सहायक आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग शिल्पा साय ने बताया कि जिले में जिन सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों की प्रबंधन योजना जिला कार्यालय द्वारा चयनित की जाएगी, संबंधित ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधन क्षेत्र के विकास के लिए 50 हजार रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस राशि का उपयोग वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन, वृक्षारोपण, मृदा एवं जल संरक्षण तथा अन्य विकास कार्यों में किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
संसाधनों के विकास में लगेगी राशि
सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से वन क्षेत्रों का विकास और संरक्षण अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। प्रशासन का उद्देश्य ग्राम सभाओं और समितियों को मजबूत बनाकर प्राकृतिक संसाधनों का लंबे समय तक संरक्षण सुनिश्चित करना है।