कृषि संवाद : जन चौपाल में किसानों को मिला खेती सुधार का संदेश, बांटे उड़द बीज किट
महासमुंद विकासखंड के ग्राम पंचायत परसदा में आयोजित जन चौपाल कार्यक्रम में विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने किसानों को उड़द बीज किट वितरित किए। इस दौरान किसानों को फसल विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीक, एग्रीस्टैक पंजीयन, पीएम किसान योजना और शासन की किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को दलहन-तिलहन फसलों को बढ़ावा देने, मृदा परीक्षण और मौसम आधारित खेती अपनाने की सलाह दी।
कीर्तिमान डेस्क
11 Jul 2026, 09:33 AM
महासमुंद
विकासखंड के ग्राम पंचायत परसदा में खरीफ सीजन की तैयारियों को लेकर जन चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने किसानों से संवाद करते हुए खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों और फसल विविधीकरण को अपनाने पर जोर दिया।
किसानों की आय बढ़ाने फसल विविधीकरण पर जोर
उन्होंने किसानों से परंपरागत खेती के साथ-साथ दलहन, तिलहन एवं अन्य नकदी फसलों का उत्पादन बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि धान के साथ फसल विविधीकरण अपनाने से भूमि की उर्वरता बनी रहती है, उत्पादन लागत कम होती है तथा किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने किसानों से शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की।
विधायक ने लगाई चौपाल
धान के साथ दलहन-तिलहन अपनाने की अपील
कार्यक्रम में विधायक ने किसानों को उड़द बीज किट का वितरण किया और कहा कि दलहन एवं तिलहन फसलों को बढ़ावा देने से किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने किसानों को धान के साथ-साथ उड़द, मूंग, अरहर, तिल और अन्य नकदी फसलों की खेती करने की सलाह दी।
एग्रीस्टैक और पीएम किसान की जानकारी
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों के हित में कई योजनाएं संचालित कर रही हैं, जिनका लाभ लेने के लिए किसानों को जागरूक रहना जरूरी है। एग्रीस्टैक पंजीयन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, मृदा स्वास्थ्य परीक्षण और कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी किसानों को दी गई।
मृदा परीक्षण से बढ़ेगा उत्पादन,घटेगी लागत
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को जैविक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग और मौसम आधारित कृषि प्रबंधन के बारे में विस्तार से बताया। विशेषज्ञों ने बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए फसल विविधीकरण को समय की आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीणजन, जनप्रतिनिधि और कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।