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400 किसानों ने सीखी मखाना खेती की तकनीक
400 किसानों ने सीखी मखाना खेती की तकनीक
महासमुंद

कृषि में नई पहल : 400 प्रगतिशील किसानों ने सीखी वैज्ञानिक तकनीक, मखाना खेती से बदलेगी किसानों की तकदीर

महासमुंद जिले के 400 प्रगतिशील किसानों को मखाना की वैज्ञानिक खेती के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम में आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। उद्यानिकी विभाग की इस पहल का उद्देश्य किसानों को कृषि विविधीकरण से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के नए अवसर उपलब्ध कराना है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 11 Jul 2026, 08:39 AM · अपडेट: 31 Oct 2026, 12:23 AM
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
जिले में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों को खेती के नए विकल्पों से जोड़ने की दिशा में उद्यानिकी विभाग की ओर से महत्वपूर्ण पहल की गई है। विभाग द्वारा जिले के 400 प्रगतिशील किसानों के लिए मखाना की वैज्ञानिक खेती को लेकर पांच दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम 1 जुलाई से 5 जुलाई 2026 तक आयोजित हुआ, जिसमें बागबाहरा, पिथौरा, बसना, सरायपाली और महासमुंद विकासखंड के किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मखाना उत्पादन की आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ इसकी खेती के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई।

वैज्ञानिकों ने किसानों को बताई मखाना उत्पादन की तकनीक 

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक और मखाना परियोजना के समन्वयक डॉ. गजेंद्र चंद्राकर ने किसानों को मखाना उत्पादन की वैज्ञानिक प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने किसानों को बीज चयन, सही समय पर बुवाई, तालाब प्रबंधन, पोषक तत्वों का उपयोग, रोग एवं कीट नियंत्रण, फसल कटाई, प्रसंस्करण और बाजार प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि मखाना एक उच्च मूल्य वाली फसल है, जिसे अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं।

मखाना खेती से बढ़ेगी किसानों की आय 

मुख्य अतिथि चंद्रहास चंद्राकर ने कहा कि वर्तमान समय में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ ऐसी फसलों की ओर भी बढ़ना चाहिए, जिनसे अधिक आर्थिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि मखाना उत्पादन किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर माध्यम बन सकता है। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण के दौरान मिली जानकारी को अपने खेतों में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रशिक्षण की सफलता तभी मानी जाती है, जब किसान उसे व्यवहार में लागू करें। 

किसानों ने जताई नई खेती को अपनाने में रुचि 

प्रशिक्षण और भ्रमण के दौरान किसानों ने मखाना उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को करीब से समझा। किसानों ने इस फसल को लेकर उत्साह दिखाते हुए कहा कि कम लागत, बाजार में अच्छी मांग और बेहतर आमदनी की संभावना को देखते हुए मखाना खेती भविष्य में उनके लिए लाभकारी विकल्प साबित हो सकती है।

विभाग लगातार कर रहा नई तकनीकों से जोड़ने का प्रयास 

कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. एकानंद ढीमर, डॉ. योगेंद्र चंदेल, प्रबंधक संजय नामदेव और शिव साहू का विशेष योगदान रहा। सहायक संचालक उद्यान पायल साहू ने बताया कि किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और कृषि आधारित रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा लगातार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मखाना जैसी लाभकारी फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जिले में कृषि के नए मॉडल विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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