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छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर सख्त तैयारी : अब 90 दिन पहले देनी होगी कलेक्टर को सूचना, घर वापसी के लिए 15 दिन का वक्त
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर नियम कड़े किए गए हैं। नए प्रावधानों के तहत धर्म परिवर्तन से 90 दिन पहले कलेक्टर को सूचना देनी होगी, जबकि अंतर-धार्मिक विवाह से जुड़े धर्मांतरण के लिए 60 दिन पहले जानकारी देना अनिवार्य होगा। अवैध, जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने पर कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में धर्मांतरण की बढ़ती गतिविधियों और उससे जुड़े विवादों पर लगाम लगाने के लिए नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। 'छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य नियम-2026' के तहत अब राज्य में धर्म परिवर्तन करना कोई आसान प्रक्रिया नहीं होगी। नए प्रावधानों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म बदलना चाहता है, तो उसे धर्मांतरण की तय तारीख से कम से कम 90 दिन पहले संबंधित जिले के कलेक्टर को इसकी लिखित जानकारी देनी होगी। दूसरी ओर, सरकार ने अपने मूल या पैतृक धर्म में वापस लौटने वालों ('घर वापसी') को बड़ी राहत दी है।
तीसरे पक्ष की सहमति की बाध्यता नहीं
इसके लिए एक सुगम व्यवस्था बनाई गई है, जिसके तहत सूचना मिलने के महज 15 दिनों के भीतर पूरी प्रशासनिक जांच और प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में किसी भी तीसरे पक्ष की सहमति की बाध्यता नहीं रहेगी। नए नियमों में अंतर-धार्मिक विवाह और शादी के उद्देश्य से किए जाने वाले धर्मांतरण पर विशेष सख्ती बरती गई है। अगर दो अलग-अलग धर्मों के व्यक्ति शादी कर रहे हैं और उसमें धर्म परिवर्तन शामिल है, तो विवाह से न्यूनतम 60 दिन पहले जिला प्रशासन को इसकी सूचना देना अनिवार्य होगा।
बिना सूचना के किया गया धर्मांतरण अपराध
प्रशासन इस जानकारी को ऑनलाइन पोर्टल और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करेगा। नोटिस जारी होने के बाद 30 दिनों तक आम जनता या संबंधित पक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। बिना पूर्व सूचना के किया गया धर्मांतरण गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध माना जाएगा। बस्तर और सरगुजा जैसे जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में धर्मांतरण की लगातार आ रही शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ग्राम सभाओं को बेहद मजबूत अधिकार दिए गए हैं।
ग्राम सभा की राय सर्वोपरि
अब इन इलाकों में धर्म परिवर्तन से जुड़ी किसी भी शिकायत या आपत्तियों की जांच में ग्राम सभा की राय सर्वोपरि होगी। यदि बल, लालच, छल या धोखाधड़ी के जरिए धर्मांतरण की बात सामने आती है, तो ग्राम सभा की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस और प्रशासनिक नोडल अधिकारी तुरंत एक्शन लेंगे।
राज्य में अब हर धर्मांतरण का एक डिजिटल और पारदर्शी ऑनलाइन रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसके अलावा:
आयोजकों के लिए रजिस्ट्रेशन: धर्मांतरण के कार्यक्रम आयोजित करने वाली संस्थाओं या व्यक्तियों को 30 दिन पहले पंजीकरण कराना होगा। यह रजिस्ट्रेशन 5 साल तक मान्य रहेगा।
विदेशी फंड पर नजर: ऐसी सभी संस्थाओं के घरेलू और विदेशी वित्तीय लेनदेन (फंडिंग) की प्रशासनिक निगरानी की जाएगी।
धर्मगुरुओं की निगरानी: धर्मांतरण कराने वाले धर्मगुरु भी सीधे तौर पर प्रशासन के रडार पर रहेंगे।
प्रशासन ने अवैध रूप से कराए जाने वाले धर्मांतरण के मामलों में कठोर दंड के प्रावधान तय किए हैं:
सामान्य अवैध धर्मांतरण: 7 से 10 वर्ष तक की जेल और न्यूनतम 5 लाख रुपये तक का जुर्माना।
महिला, नाबालिग, SC/ST का धर्मांतरण: 10 से 20 वर्ष तक की जेल और न्यूनतम 10 लाख रुपये तक जुर्माना।
सामूहिक धर्मांतरण: 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना।
लोक सेवक (सरकारी कर्मचारी) की संलिप्तता: 10 से 20 वर्ष की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना।
पैसे या संपत्ति के लालच में धर्मांतरण: 10 से 20 वर्ष की जेल और 20 लाख रुपये तक का जुर्माना।
डर, भय या प्रलोभन दिखाकर धर्मांतरण: 10 से 20 वर्ष तक का कारावास और न्यूनतम 30 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना।