Gold Smuggling: त्योहारों के सीजन में सोने की बढ़ती मांग के बीच तस्करी का मामला सामने आया है। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) की कार्रवाई में खुलासा हुआ है कि तस्करी से जुड़े गिरोह विदेशी मूल के सोने को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए रेल मार्गो का इस्तेमान कर रहे हैं। जांच एजेंसी ने देश के विभिन्न हिस्सों में कार्रवाई करते हुए 41 किलो विदेशी मूल का सोना जब्त किया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 62 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
इस मामले में तीन विदेशी नागरिकों समेत 24 लोगों को अरेस्ट किया गया है। खुलासे के बाद रेलवे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और प्रमुख स्टेशनों के साथ लंबी दूरी की ट्रेनों में जांच बढ़ा दी गई है।
हवाई अड्डों पर सख्ती के बाद रेल मार्ग पर नजर
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, हवाई अड्डों पर कड़ी निगरानी और जांच से बचने के लिए तस्करी से जुड़े गिरोह लंबी दूरी की यात्री और एक्सप्रेस ट्रेनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कोलकाता और हावड़ा को सोने की तस्करी के प्रमुख पारगमन केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। यहां से विदेशी सोने को मुंबई समेत देश के अन्य बडे़ बाजाराें तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि तस्करी के सोने को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने और उसका स्वरूप बदलने जैसी तरकीबें अपनाई जाती हैं। इससे सामान्य तलाशी के दौरान सोने की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। तस्कर आम यात्रियों की तरह सफर करते हैं और अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग नामों का इस्तेमाल भी करते हैं।
हावड़ा स्टेशन पर संदिग्ध यात्री से खुला मामला
पश्चिम बंगाल के हावड़ा रेलवे स्टेशन पर DRI की एक विशेष कार्रवाई के दौरान एक संदिग्ध यात्री को पकड़ा गया। जांच में पता चला कि वह अपनी पहचान और नाम बदलकर यात्रा कर रहा था। पूछताछ के दौरान बांग्लादेश सीमा से अवैध रूप से लाए गए सोने को पहले कोलकाता पहुंचाने और फिर रेल मार्ग से मुंबई भेजने की जानकारी सामने आई। इस खुलासे के बाद रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में संदिग्ध यात्रियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई है। हालांकि, तस्करी के पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।धनतेरस और दिवाली से पहले रेलवे में बढ़ेगी निगरानी
धनतेरस और दिवाली पर सोने की खरीदारी को शुभ माना जाता है। ऐसे में त्योहारों के आसपास आभूषण बाजार में मांग बढ़ जाती है। इसी बढ़ती मांग का फायदा उठाकर तस्करी करने वाले गिरोह भी सक्रिय हो सकते हैं। इसी को देखते हुए रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और अन्य संबंधित एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।







