Chhattisgarh News: राजधानी रायपुर में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। तेलीबांधा के रिंग रोड नंबर-1 स्थित श्री अनंत साईं हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान कई अनियमितताएं मिलने का दावा किया गया है। मामले में राज्य नोडल एजेंसी ने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। स्वास्थ्य विभाग के राज्य स्तरीय जांच दल ने 30 सितंबर को अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। जांच के दौरान मरीजों को अस्पताल लाने के तरीके, भर्ती से जुड़े दस्तावेज और डिस्चार्ज रिकॉर्ड में कई ऐसी बातें सामने आईं, जिन पर विभाग ने सवाल उठाए हैं।
बस में बैठाकर अस्पताल लाने की बात आई सामने
जांच दल ने फोन के माध्यम से 11 मरीजों से संपर्क किया। इनमें से छह मरीजों ने बताया कि उन्हें अलग-अलग समूहों में एजेंट बस में बैठाकर अस्पताल लेकर आए थे। इन मरीजों में रामप्रसाद, दुलना यादव, मंगमोती चौहान, रघुनाथ विशाल, नेत्रन्द सिदार और कंवर सिंह शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, संपर्क किए गए तीन मरीजों ने एजेंट का नाम धनिराम यादव बताया। इस जानकारी के आधार पर जांच दल ने आशंका जताई कि मरीजों को एकत्रित कर अस्पताल में भर्ती कराने के लिए एजेंट की भूमिका हो सकती है।
13 मरीज भर्ती मिले, बेड हेड टिकट नहीं मिले
अस्पताल के निरीक्षण के दौरान जांच दल को कुल 13 मरीज भर्ती मिले। रिपोर्ट में बताया गया है कि इन मरीजों के बेड हेड टिकट (BHT) उपलब्ध नहीं थे। अस्पताल में भर्ती मरीजों का यह महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होता है, जिसमें इलाज और चिकित्सकीय देखरेख से जुड़ी जानकारियां दर्ज की जाती हैं।
जांच के दौरान मरीजों के दूसरे राज्यों से आने का मामला भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती मरीजों में नौ मरीज मध्य प्रदेश के शहडोल से थे। इनमें पार्वती बाई और मुन्नी बाई के नाम शामिल हैं। वहीं, गौरी मेहेर और घना मेहेर समेत पांच मरीज ओडिशा से आए थे। रिपोर्ट में इन परिस्थितियों के आधार पर योजना के तहत अनावश्यक भर्ती और आयुष्मान कार्ड के संभावित दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।
जांच रिपोर्ट में डिस्चार्ज किए गए मरीजों के रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया गया है। इसमें बीमारी और भर्ती की अवधि में लगभग पांच दिनों का एक जैसा पैटर्न पाए जाने की बात कही गई है।
तीन दिनों में देना होगा स्पष्टीकरण
राज्य नोडल एजेंसी ने अस्पताल प्रबंधन को नोटिस प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अब अस्पताल की ओर से दिए जाने वाले जवाब और जांच रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल, इस मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। जांच में सामने आए आरोपों पर अस्पताल का पक्ष और नोडल एजेंसी की आगे की कार्रवाई स्पष्ट होने के बाद ही मामले की स्थिति पूरी तरह सामने आएगी।






