उत्तराखंड के मिनी स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले चोपता से होकर पवित्र तुंगनाथ धाम और उससे भी ऊंचाई पर स्थित चंद्रशीला चोटी (समुद्र तल से लगभग 13,123 फीट) की यात्रा इन दिनों अपने पूरे शबाब पर है। जून के इस महीने में भीषण गर्मी से राहत पाने और अध्यात्म का अनुभव करने के लिए देश-विदेश से भारी संख्या में ट्रैकर और शिवभक्त चंद्रशीला पहुँच रहे हैं।
मौसम का मिजाज: सुहावना सफर, लेकिन दोपहर बाद एहतियात जरूरी
वर्तमान में चंद्रशीला और चोपता क्षेत्र का मौसम बेहद सुहावना और रिझाने वाला बना हुआ है।
तापमान: दिन का तापमान 12°C से 18°C के बीच बना हुआ है, जो ट्रेकिंग के लिए एकदम मुफीद है। हालाँकि, रात के समय पारा लुढ़ककर 4°C से 6°C तक पहुँच रहा है, जिससे कड़ाके की ठंड का अहसास हो रहा है।
मौसम का बदलता रूप: सुबह के समय आसमान पूरी तरह साफ रहता है, जिससे चंद्रशीला चोटी से हिमालय की प्रसिद्ध चोटियों (नंदा देवी, त्रिशूल, चौखंबा) का भव्य नजारा साफ दिखाई दे रहा है। लेकिन दोपहर बाद ऊंचे इलाकों में हल्के बादल छाने और ठंडी हवाएं चलने का सिलसिला जारी है। प्रशासन ने यात्रियों को अपने साथ पर्याप्त ऊनी कपड़े और रेनकोट रखने की सलाह दी है।
आंकड़ों की जुबानी: अब तक टूटे रिकॉर्ड, आगे और बड़ी उम्मीद
इस साल चंद्रशीला जाने वाले यात्रियों की संख्या पिछले सभी रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ रही है।
| विवरण | यात्रियों का आंकड़ा |
| अब तक पहुँच चुके यात्री (इस सीजन) | 50,000+ (लगभग) |
| दैनिक औसत फुटफॉल | 1,500 से 2,000 यात्री प्रतिदिन |
| आगामी हफ्तों में अनुमानित संख्या | 70,000 से अधिक अतिरिक्त यात्री |
प्रशासन का अनुमान: स्थानीय पर्यटन अधिकारियों और व्यापार मंडल के अनुसार, जून के उत्तरार्ध और आने वाले महीनों में वीकेंड पर भीड़ और बढ़ने वाली है। इस पूरे यात्रा सीजन में कुल यात्रियों का आंकड़ा 1.20 लाख के पार जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
यात्रियों के लिए जरूरी गाइडलाइन और तैयारी
यदि आप भी आने वाले दिनों में चंद्रशीला फतह करने की सोच रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
जल्दी शुरू करें चढ़ाई: चंद्रशीला चोटी के लिए चोपता से तुंगनाथ होते हुए लगभग 5 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई है। दोपहर के बाद मौसम बदलने के खतरे को देखते हुए सुबह 4 से 5 बजे के बीच चढ़ाई शुरू करना सबसे सुरक्षित है ताकि दोपहर तक आप वापस बेस कैंप आ सकें।
फिटनेस और एक्यूट माउंटेन सिकनेस (AMS): अत्यधिक ऊंचाई होने के कारण हवा पतली हो जाती है। अपने साथ कपूर, ओआरएस (ORS) और पानी की बोतल जरूर रखें। सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत नीचे आएं।
प्लास्टिक मुक्त रखें ट्रैक: स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण प्रेमियों ने अपील की है कि बुग्यालों (घास के मैदानों) की खूबसूरती बनाए रखने के लिए कचरा डस्टबिन में ही डालें।
