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पुनर्वासित महिलाओं का रैंप वॉक
पुनर्वासित महिलाओं का रैंप वॉक
रायपुर

आत्मविश्वास: रैंप पर उतरीं 9 पुनर्वासित महिलाएं, तालियों से गूंज उठा ऑडिटोरियम

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के फैशन शो में 9 पुनर्वासित महिलाओं ने पहली बार रैंप वॉक किया। कभी नक्सलवाद से जुड़ी रहीं ये महिलाएं अब सरकार की पुनर्वास नीति के सहारे आत्मनिर्भरता और नई पहचान की ओर बढ़ रही हैं। फेमिना मिस इंडिया छत्तीसगढ़ 2026 अनुष्का सोन के साथ उनके रैंप पर उतरते ही पूरा ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
07 Aug 2026, 05:25 PM
रायपुर

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में इस बार फैशन शो का नजारा बेहद खास रहा। रैंप पर पहली बार 9 पुनर्वासित महिलाओं ने वॉक कर अपनी नई पहचान और बदली हुई जिंदगी की तस्वीर पेश की। कभी नक्सलवाद की राह पर रहीं ये महिलाएं अब समाज की मुख्यधारा से जुड़कर अपने हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर आगे बढ़ रही हैं। इन पुनर्वासित महिलाओं ने फेमिना मिस इंडिया छत्तीसगढ़ 2026 अनुष्का सोन के साथ रैंप वॉक किया। जैसे ही वे पारंपरिक हथकरघा परिधानों में सजकर रैंप पर पहुंचीं, पूरा ऑडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनके चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ दिखाई दे रहा था।

छत्तीसगढ़ के साथ किया रैंप वॉक

यह पल सिर्फ एक फैशन शो का हिस्सा नहीं था, बल्कि बदलाव और नई शुरुआत का प्रतीक भी बना। जिन महिलाओं ने कभी हिंसा और संघर्ष का दौर देखा था, उन्होंने आज अपने आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ समाज के सामने नई मिसाल पेश की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्री लखन लाल देवांगन, मंत्री गजेंद्र यादव और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह मौजूद रहे। सभी जनप्रतिनिधियों ने इन महिलाओं के प्रयासों की सराहना की और उनके आत्मविश्वास की जमकर प्रशंसा की।

नक्सलवाद से नई पहचान तक का सफर, पुनर्वासित 

पुनर्वास नीति से मिली नई राह

उन्होंने कहा कि पुनर्वास के जरिए समाज से जुड़ रही महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलना सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर ये महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। बातचीत के दौरान महिलाओं ने बताया कि उन्हें राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ मिल रहा है। सरकार के सहयोग से उन्हें अपने हुनर को निखारने, रोजगार से जुड़ने और समाज में सम्मानजनक स्थान बनाने का अवसर मिल रहा है।

एक महीने में बदला आत्मविश्वास

उन्होंने कहा कि पहले जीवन में कई कठिनाइयां थीं, लेकिन अब उन्हें नई उम्मीद और नई दिशा मिली है। प्रशिक्षण और सहयोग के माध्यम से वे अपनी क्षमताओं को पहचान रही हैं और आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रही हैं। खास बात यह रही कि करीब एक महीने पहले जब इन महिलाओं से मुलाकात हुई थी, तब उनके अंदर काफी झिझक और संकोच दिखाई दे रहा था। लेकिन लगातार मिले प्रोत्साहन और सहयोग के बाद आज वही महिलाएं पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर नजर आईं। 

आत्मनिर्भरता तक का सफर

उनके कदमों में भरोसा और चेहरे पर खुशी ने यह साबित कर दिया कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपनी पुरानी पहचान को पीछे छोड़कर नई शुरुआत कर सकता है। कभी जिन महिलाओं की पहचान नक्सलवाद से जुड़ी थी, आज वही महिलाएं हुनर, मेहनत और आत्मनिर्भरता के जरिए अपनी अलग पहचान बना रही हैं। उनका यह सफर समाज में बदलाव, पुनर्वास और उम्मीद की एक प्रेरणादायक कहानी बनकर सामने आया है।

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