छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। महासमुंद में बुधवार को कांग्रेस ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बिजली कार्यालय का घेराव किया। बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी सड़कों पर उतरे, सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और बढ़ी हुई बिजली दरों को वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनता को राहत देने के वादे किए गए थे, लेकिन अब बिजली की दरें बढ़ाकर आम लोगों, किसानों और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि महंगाई से जूझ रही जनता पर यह फैसला सीधा असर डालेगा।
दरअसल, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों को मंजूरी दी है। संशोधित टैरिफ के तहत घरेलू, व्यावसायिक, कृषि और औद्योगिक श्रेणियों में बिजली शुल्क बढ़ाया गया है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए कितनी बढ़ी बिजली
आयोग के फैसले के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग खपत स्लैब में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है।
- 0 से 100 यूनिट तक: 30 पैसे प्रति यूनिट बढ़ोतरी
- 101 से 200 यूनिट तक: 30 पैसे प्रति यूनिट बढ़ोतरी
- 201 से 600 यूनिट तक: 40 पैसे प्रति यूनिट बढ़ोतरी
- 600 यूनिट से अधिक खपत पर: 50 पैसे प्रति यूनिट बढ़ोतरी
हालांकि 10 किलोवाट तक के घरेलू कनेक्शनों पर फिक्स्ड चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 10 किलोवाट से अधिक भार वाले उपभोक्ताओं के लिए स्थिर शुल्क 40 रुपए से बढ़ाकर 50 रुपए प्रति किलोवाट प्रतिमाह कर दिया गया है।
दुकानदारों और कारोबारियों पर भी असर
व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक वृद्धि की गई है। कुछ श्रेणियों में दरें 6.10 रुपए से बढ़कर 6.30 रुपए प्रति यूनिट और 6.35 रुपए से बढ़कर 6.55 रुपए प्रति यूनिट हो गई हैं।
इसका असर दुकानों, छोटे व्यवसायों, कार्यालयों और सेवा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठानों पर पड़ सकता है।
किसानों को बढ़ी दर के साथ अतिरिक्त राहत
कृषि पंपों के लिए बिजली दर में 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि किसानों को राहत देने के लिए गैर-सब्सिडी वाले कृषि कनेक्शनों पर ऊर्जा प्रभार छूट 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दी गई है। आयोग का दावा है कि अतिरिक्त छूट के कारण किसानों पर बढ़ी हुई दरों का प्रभाव सीमित रहेगा।
उद्योगों के लिए भी महंगी होगी बिजली
औद्योगिक और हाईटेंशन (एचटी) श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए 25 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है।
- स्टील उद्योगों के लिए 220 केवी श्रेणी में दर 6.10 रुपए से बढ़कर 6.40 रुपए प्रति यूनिट
- अन्य उद्योगों के लिए 220 केवी श्रेणी में 6.65 रुपए से बढ़कर 6.95 रुपए प्रति यूनिट
- रेलवे ट्रैक्शन की दर 5.55 रुपए से बढ़कर 5.90 रुपए प्रति यूनिट
इसके अलावा 220 केवी और 132 केवी श्रेणी में डिमांड चार्ज भी बढ़ाया गया है।
आयोग का दावा- राहत योजनाओं से कम होगा असर
बिजली दरों में वृद्धि के बावजूद नियामक आयोग का कहना है कि राज्य में लागू राहत योजनाओं के कारण अधिकांश घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा। मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक आधा बिजली बिल देने की सुविधा जारी रहेगी। आयोग के अनुसार ऐसे उपभोक्ताओं पर बढ़ोतरी का वास्तविक असर औसतन 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के बराबर रहेगा। वहीं पीएम सूर्यघर योजना के तहत रूफटॉप सोलर अपनाने वाले उपभोक्ताओं के बिजली बिल पर भी बढ़ी हुई दरों का असर अपेक्षाकृत कम पड़ेगा।
कांग्रेस ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि सरकार बिजली दरों में की गई वृद्धि वापस नहीं लेती तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच बिजली शुल्क में वृद्धि आम जनता के हित में नहीं है। फिलहाल बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विरोध महासमुंद में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब निगाहें सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राजनीतिक रणनीति पर टिकी हैं।
