छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में बच्चों से कराए जा रहे मंत्रोच्चार को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। 16 जून से राज्य के स्कूल दोबारा खुलने के बाद यह मुद्दा तेजी से सुर्खियों में है। जानकारी के मुताबिक, कई सरकारी स्कूलों में दिन की शुरुआत से लेकर छुट्टी तक बच्चों से वैदिक मंत्रोच्चार कराया जा रहा है।
कांग्रेस ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए सरकार पर वैचारिक एजेंडा थोपने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि स्कूलों को एक खास विचारधारा से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस मीडिया प्रभारी आनंद शुक्ला ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में किसी एक धर्म विशेष की परंपराओं को बढ़ावा देना उचित नहीं है।
धर्मनिरपेक्षता पर उठे सवाल
अनुशासन और देशभक्ति पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंत्रोच्चार से बच्चों में एकाग्रता और अनुशासन बढ़ता है। उनके अनुसार, ऐसे अभ्यास बच्चों के भीतर आध्यात्मिक शक्ति और संस्कार विकसित करते हैं, जिससे वे अच्छे नागरिक और सच्चे देशभक्त बनते हैं।
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कांग्रेस को सनातन विरोधी मानसिकता वाला बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विरोध करती रही है।