एम्स रायपुर में महज 12 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाली सुमना कुंडू ने अपने अंगदान के माध्यम से मानवता की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने दो परिवारों की जिंदगी बदल दी। भले ही सुमना अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका योगदान उन्हें हमेशा लोगों के दिलों में अमर बनाए रखेगा।
सोटो छत्तीसगढ़ और एम्स रायपुर के समन्वय से सुमना कुंडू की एक किडनी 15 वर्षीय किशोर को दी गई, जो पिछले तीन वर्षों से डायलिसिस पर निर्भर था। वहीं दूसरी किडनी 45 वर्षीय व्यक्ति को प्रत्यारोपित की गई, जो पिछले पांच वर्षों से डायलिसिस की समस्या से जूझ रहा था।
गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं सुमना
सुमना लंबे समय से पिक्नोडाइसोस्टोसिस और इंट्राक्रेनियल हाइपरटेंशन जैसी गंभीर बीमारियों से संघर्ष कर रही थीं। वह लगातार जीवन के लिए संघर्ष कर रही थीं, लेकिन 29 मई को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें एम्स रायपुर में भर्ती कराया गया।दोनों प्रत्यारोपण सफल रहे हैं और डॉक्टरों के अनुसार मरीजों की स्थिति में तेजी से सुधार देखा जा रहा है। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। आईसीयू में 9 दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर इलाज चला, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो सका और अंततः उन्होंने दम तोड़ दिया।
परिवार का बड़ा निर्णय, बनीं दो जिंदगियों की वजह
डॉक्टरों ने जब परिवार को अंगदान के बारे में समझाया, तो परिवार ने बेहद भावुक लेकिन साहसी निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी बेटी किसी और की जिंदगी बचा सकती है, तो यह सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। इसी निर्णय ने दो लोगों को नया जीवन दे दिया।
मानवता के इस महान योगदान के सम्मान में सुमना कुंडू को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी गई। यह क्षण पूरे चिकित्सा समुदाय और परिवार के लिए भावुक और प्रेरणादायक रहा।
