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शिक्षा पर संकट :  बच्चों का भविष्य एक शिक्षक के भरोसे, जिले के 307 स्कूलों में स्टाफ की भारी कमी 

जिले की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के बाद भी सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो सकी है। हालात यह हैं कि जिले के 307 प्राथमिक विद्यालय आज भी केवल एक शिक्षक के सहारे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 26 Jun 2026, 04:11 PM · अपडेट: 07 Oct 2026, 07:13 PM
जगदलपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

जिले की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के बाद भी सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो सकी है। हालात यह हैं कि जिले के 307 प्राथमिक विद्यालय आज भी केवल एक शिक्षक के सहारे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

 एकल शिक्षकीय स्कूलों की संख्या बढ़ी शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार पहले जिले में 292 एकल शिक्षकीय प्राथमिक विद्यालय थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 307 हो गई है। यानी युक्तियुक्तकरण के बाद भी समस्या कम होने के बजाय और बढ़ गई है। इससे स्पष्ट है कि कई स्कूल अब भी पर्याप्त शिक्षकों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।  

एक शिक्षक पर कई जिम्मेदारियों का बोझ 

कई कारणों से और बिगड़ी स्थिति अधिकारियों का कहना है कि कई प्रधान अध्यापकों के निधन, कुछ शिक्षकों के दूसरी सरकारी नौकरियों में चयन और कई के इस्तीफा देने के कारण शिक्षकों की संख्या और घट गई। इसका सीधा असर प्राथमिक स्कूलों की व्यवस्था पर पड़ा है, जहां एक ही शिक्षक को पूरी जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। एक शिक्षक पर कई जिम्मेदारियों का बोझ इन विद्यालयों में पदस्थ एकमात्र शिक्षक को बच्चों की पढ़ाई कराने के साथ-साथ मिड-डे मील की व्यवस्था, स्कूल के रिकॉर्ड का संधारण, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और अन्य प्रशासनिक कार्य भी देखने पड़ते हैं। ऐसे में शिक्षण कार्य प्रभावित होना स्वाभाविक माना जा रहा है।

 युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य 

 युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया इस उद्देश्य से लागू की थी कि सभी स्कूलों में शिक्षकों का संतुलित वितरण हो सके। हालांकि जमीनी स्थिति बताती है कि कई विद्यालय अब भी शिक्षक संकट से जूझ रहे हैं और अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। नई भर्ती के बाद ही मिलेगी राहत शिक्षा विभाग का कहना है कि जब तक नए शिक्षकों की भर्ती पूरी नहीं होती और उनकी पदस्थापना नहीं की जाती, तब तक एकल शिक्षकीय विद्यालयों की संख्या में कमी आना मुश्किल है। विभाग को उम्मीद है कि नई नियुक्तियों के बाद इस समस्या का समाधान संभव हो सकेगा। सबसे बड़ा सवाल बच्चों के भविष्य का अब सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर कब तक सैकड़ों स्कूलों के बच्चे केवल एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई करेंगे। 

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