छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पुलिस ने 61.06 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले का बड़ा खुलासा करते हुए केरल से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी साइबर अपराधियों को बैंक खाते किराए पर उपलब्ध कराते थे और उन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम का लेन-देन किया जाता था। पुलिस के अनुसार, एक आरोपी के नाम पर 7 से 8 बैंक खाते संचालित हो रहे थे, जिनका इस्तेमाल अवैध रकम ट्रांसफर करने और नकदी निकालने के लिए किया जाता था।
ऑनलाइन टास्क के बहाने खाते में जमा कराए लाखों रुपये मामला गीदम थाना क्षेत्र का है। गीदम निवासी भूपेंद्र तेलामी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि ऑनलाइन टास्क और निवेश से अधिक मुनाफे का झांसा देकर उससे अलग-अलग बैंक खातों में करीब 61.06 लाख रुपये जमा कराए गए। बाद में जब उसे ठगी का एहसास हुआ तो उसने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
तकनीकी जांच से खुली साइबर नेटवर्क की परतें
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों के रिकॉर्ड और भारत सरकार के समन्वय पोर्टल की मदद से साइबर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ीं। जांच के दौरान पता चला कि इस गिरोह के तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं। इससे पहले इसी मामले में महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली और केरल से भी कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। केरल से तीन आरोपी दबोचे गए फरार आरोपियों की तलाश में भेजी गई पुलिस टीम ने केरल के कोझिकोड से मोहम्मद नीजाज आरएम (21), अभिनव श्रीनिवास (23) और मोहम्मद साहिल (21) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में मोहम्मद नीजाज ने स्वीकार किया कि उसके नाम पर कई बैंकों में 7 से 8 खाते संचालित थे, जिनका उपयोग साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने और नकद निकासी के लिए किया जाता था। पुलिस हिरासत से भागा आरोपी, अगले दिन फिर पकड़ा गया दंतेवाड़ा पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों को छत्तीसगढ़ लाने के दौरान 20 जून को मोहम्मद नीजाज केरल के मलाबार क्षेत्र स्थित एक लॉज से पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था।एसपी ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील
स्थानीय पुलिस में मामला दर्ज कराने के बाद विशेष टीम ने अगले ही दिन उसे दोबारा गिरफ्तार कर लिया। कमीशन लेकर रकम दूसरे खातों और क्रिप्टो में भेजते थे पूछताछ में अभिनव श्रीनिवास ने बताया कि वह परिचितों और अन्य लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनमें साइबर ठगी की रकम मंगवाता था। इसके बाद कमीशन लेकर पैसे अन्य बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से आगे भेज दिए जाते थे। वहीं, मोहम्मद साहिल ने भी स्वीकार किया कि उसके बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेन-देन और निकासी में किया गया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से मिले डिजिटल और वित्तीय इनपुट के आधार पर साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए तकनीकी जांच और अंतरराज्यीय कार्रवाई लगातार जारी है। गिरफ्तार तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद 27 जून तक न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऑनलाइन निवेश, पार्ट-टाइम जॉब, टास्क पूरा कर कमाई और अज्ञात लिंक जैसे लालच में न आएं। यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
