बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले स्थित बैलाडीला क्षेत्र में लौह अयस्क परिवहन से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। विजिलेंस की टॉप-सीक्रेट जांच में यह खुलासा हुआ है कि एक स्वीकृत मालगाड़ी रैक में फर्जी तरीके से 2 अतिरिक्त वैगन जोड़कर करोड़ों रुपए मूल्य का लौह अयस्क अवैध रूप से रवाना कर दिया गया।
इस घटना ने एनएमडीसी, भारतीय रेलवे और पूरे खनिज निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार अक्टूबर 2025 में बचेली और किरंदुल लोडिंग प्लांट से 57 वैगनों की स्वीकृत रैक रवाना की गई थी। लेकिन जांच में सामने आया कि इस रैक में गुपचुप तरीके से 2 अतिरिक्त वैगन जोड़ दिए गए।
डिजिटल सिस्टम की नाकामी पर सवाल
एक कर्मचारी बर्खास्त, अफसरों पर रोक
मामला सामने आने के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए उस समय नंबर टेकर पद पर तैनात कर्मचारी एम. नागेश्वर राव को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
इसके अलावा—
- 5 राजपत्रित अधिकारियों पर कार्रवाई
- 3 अन्य कर्मचारियों पर जांच
- पदोन्नति और वेतनवृद्धि पर तत्काल रोक
लागू की गई है।
रेलवे और एनएमडीसी की चुप्पी पर सवाल
नेटवर्क फेल होने का संकेत
जांच में यह गंभीर लूपहोल सामने आया कि रॉयल्टी बुक और ट्रांजिट पास जैसी महत्वपूर्ण दस्तावेजी प्रक्रिया का नियंत्रण स्वतंत्र विभाग के बजाय एनएमडीसी परिसर के भीतर ही संचालित किया जा रहा था।
इससे निगरानी और पारदर्शिता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, रेलवे की अंतिम जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। चर्चा है कि मामले को केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित कर “बड़ी मछलियों” को बचाने की कोशिश की जा रही है।
बैलाडीला का यह मामला सिर्फ एक चोरी या अनियमितता नहीं, बल्कि पूरे खनिज परिवहन और निगरानी तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर करता है। डिजिटल सिस्टम, प्रशासनिक नियंत्रण और विभागीय समन्वय—तीनों स्तरों पर उठ रहे सवाल अब बड़ी जांच की मांग कर रहे हैं।
