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लौह अयस्क घोटाला
लौह अयस्क घोटाला
दंतेवाड़ा (दक्षिण बस्तर)

अयस्क घोटाला : 57 की रैक में 2 अतिरिक्त वैगन जोड़कर करोड़ों की चोरी का खुलासा

बस्तर के दंतेवाड़ा जिले स्थित बैलाडीला क्षेत्र में लौह अयस्क परिवहन से जुड़ा बड़ा घोटाला सामने आया है। विजिलेंस जांच में खुलासा हुआ कि 57 वैगनों की स्वीकृत मालगाड़ी में फर्जी तरीके से 2 अतिरिक्त वैगन जोड़कर करोड़ों रुपए का लौह अयस्क अवैध रूप से रवाना किया गया।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 13 Jun 2026, 10:36 AM · अपडेट: 11 Sep 2026, 02:09 AM
दंतेवाड़ा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले स्थित बैलाडीला क्षेत्र में लौह अयस्क परिवहन से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। विजिलेंस की टॉप-सीक्रेट जांच में यह खुलासा हुआ है कि एक स्वीकृत मालगाड़ी रैक में फर्जी तरीके से 2 अतिरिक्त वैगन जोड़कर करोड़ों रुपए मूल्य का लौह अयस्क अवैध रूप से रवाना कर दिया गया।

इस घटना ने एनएमडीसी, भारतीय रेलवे और पूरे खनिज निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार अक्टूबर 2025 में बचेली और किरंदुल लोडिंग प्लांट से 57 वैगनों की स्वीकृत रैक रवाना की गई थी। लेकिन जांच में सामने आया कि इस रैक में गुपचुप तरीके से 2 अतिरिक्त वैगन जोड़ दिए गए।

डिजिटल सिस्टम की नाकामी पर सवाल

इस पूरे रूट पर सुरक्षा की सबसे मजबूत कड़ी माने जाने वाला भांसी स्थित डिजिटल वेटमेंट सिस्टम भी इस गड़बड़ी को पकड़ने में नाकाम रहा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 2 अतिरिक्त वैगन जुड़े हुए थे और वजन भी बढ़ा था, तो सिस्टम के सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक कांटे ने इस अनियमितता को क्यों नहीं पकड़ा। विजिलेंस टीम ने जब डिजिटल लॉग, डिस्पैच रिकॉर्ड और भौतिक दस्तावेजों की गहन जांच की, तो पूरे घोटाले की पुष्टि हुई। रिकॉर्ड में दर्ज वैगनों की संख्या और वास्तविक संचालन में अंतर पाया गया, जिससे पूरी साजिश उजागर हो गई। इन अतिरिक्त वैगनों में भी कीमती लौह अयस्क भरा गया था, जिसे बिना किसी वैध अनुमति के सैकड़ों किलोमीटर दूर भेज दिया गया।

एक कर्मचारी बर्खास्त, अफसरों पर रोक

मामला सामने आने के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए उस समय नंबर टेकर पद पर तैनात कर्मचारी एम. नागेश्वर राव को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।

इसके अलावा—

  • 5 राजपत्रित अधिकारियों पर कार्रवाई
  • 3 अन्य कर्मचारियों पर जांच
  • पदोन्नति और वेतनवृद्धि पर तत्काल रोक

लागू की गई है।

रेलवे और एनएमडीसी की चुप्पी पर सवाल

डीआरएम विशाखापट्टनम ने कहा कि अभी तक एनएमडीसी की ओर से कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि पहले मामले की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी, उसके बाद ही जांच आगे बढ़ेगी। जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि सिस्टम प्रोग्रामिंग और डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर कर इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया। इससे सुरक्षा तंत्र की तकनीकी कमजोरियां भी उजागर हुई हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बैलाडीला क्षेत्र में अवैध खनन, अवैध परिवहन और भंडारण की अनियमितताएं लंबे समय से जारी हैं। इस बार खनिज विभाग, वन विभाग और एनएमडीसी की संयुक्त निगरानी प्रणाली भी विफल साबित हुई।

नेटवर्क फेल होने का संकेत

जांच में यह गंभीर लूपहोल सामने आया कि रॉयल्टी बुक और ट्रांजिट पास जैसी महत्वपूर्ण दस्तावेजी प्रक्रिया का नियंत्रण स्वतंत्र विभाग के बजाय एनएमडीसी परिसर के भीतर ही संचालित किया जा रहा था।

इससे निगरानी और पारदर्शिता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, रेलवे की अंतिम जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। चर्चा है कि मामले को केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित कर “बड़ी मछलियों” को बचाने की कोशिश की जा रही है।

बैलाडीला का यह मामला सिर्फ एक चोरी या अनियमितता नहीं, बल्कि पूरे खनिज परिवहन और निगरानी तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर करता है। डिजिटल सिस्टम, प्रशासनिक नियंत्रण और विभागीय समन्वय—तीनों स्तरों पर उठ रहे सवाल अब बड़ी जांच की मांग कर रहे हैं।

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