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शिवपुरी में पेड़ के नीचे चलती कक्षा
शिवपुरी में पेड़ के नीचे चलती कक्षा
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पेड़ के नीचे शिक्षा व्यवस्था : लावा गांव में पहली बार स्कूल शुरू, भवन नहीं फिर भी उत्साह बरकरार

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शिवपुरी गांव में स्कूल भवन का निर्माण वर्षों से अधूरा होने के कारण बच्चों को पेड़ के नीचे पढ़ाई करनी पड़ रही है। एक कमरे वाले स्कूल में बिजली और पंखे जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, वहीं शिक्षक भी खुले में पढ़ाने को मजबूर हैं। भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत होने के बावजूद काम पूरा नहीं हो सका है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
21 Jun 2026, 01:44 PM
दंतेवाड़ा

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शिवपुरी गांव में शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। यहां स्कूल भवन का निर्माण वर्षों से अधूरा पड़ा है, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई पेड़ की छांव में कराई जा रही है। स्कूल परिसर में केवल एक कमरा मौजूद है, लेकिन बिजली और पंखों जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं होने से कक्षाओं का संचालन बाहर करना पड़ रहा है।

स्थिति यह है कि छात्र ही नहीं, बल्कि दोनों शिक्षक भी पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाने का काम कर रहे हैं। गर्मी और मौसम की चुनौतियों के बावजूद शिक्षा का काम जारी है, लेकिन सुविधाओं के अभाव ने शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

10 लाख की स्वीकृति के बाद भी पूरा नहीं हुआ भवन

जानकारी के अनुसार स्कूल भवन निर्माण के लिए करीब 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। इसके बावजूद निर्माण एजेंसी की लापरवाही और धीमी कार्यप्रणाली के चलते भवन आज तक तैयार नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं दंतेवाड़ा जिले के लावा गांव में शिक्षा को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। गांव में पहली बार स्कूल की शुरुआत हुई है। हालांकि यहां भी स्कूल भवन नहीं है, लेकिन ग्रामीणों में बच्चों की पढ़ाई को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

ग्रामीणों ने दिखाई मिसाल, घर को स्कूल बनाने की पेशकश

लावा गांव के लोगों का कहना है कि जब तक स्थायी भवन नहीं बन जाता, तब तक बच्चों को पेड़ के नीचे पढ़ाया जाए। इतना ही नहीं, कई ग्रामीणों ने अपने घरों को अस्थायी स्कूल के रूप में उपलब्ध कराने की भी पेशकश की है ताकि बच्चों की शिक्षा किसी भी हालत में न रुके।

फिलहाल इस नए स्कूल में 15 छात्र अध्ययनरत हैं। उनकी पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके, इसके लिए दो शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। भवन की कमी के बावजूद ग्रामीणों और शिक्षा विभाग की पहल से बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास जारी है।

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