नामांकन की शुरुआत: 6 जुलाई से उम्मीदवार पर्चा भर सकेंगे।
आखिरी तारीख: नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई तय की गई है।
स्क्रूटनी: 14 जुलाई को नामांकनों की जांच होगी।
नाम वापसी: उम्मीदवार 16 जुलाई तक अपना नाम वापस ले सकेंगे, जिसके बाद फाइनल लिस्ट तैयार होगी।
वोटिंग (मतदान): दतिया की जनता 30 जुलाई को ईवीएम का बटन दबाकर अपना फैसला सुनाएगी।
नतीजे (काउंटिंग): 3 अगस्त को वोटों की गिनती होगी और 4 अगस्त तक दतिया को अपना नया माननीय मिल जाएगा।
क्या कहते है कानूनी नियम
इस उपचुनाव की पृष्ठभूमि में अदालत का एक बड़ा फैसला है। दरअसल, दतिया से कांग्रेस के विधायक रहे राजेंद्र भारती को 2 अप्रैल को कोर्ट ने एक कोऑपरेटिव बैंक घोटाले के मामले में दोषी करार दिया था। अदालत ने उन्हें 3 साल की सजा सुनाई थी, हालांकि बाद में उन्हें 50 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत मिल गई थी। कानूनी नियम क्या कहता है? नियम के मुताबिक, यदि किसी भी जनप्रतिनिधि (सांसद या विधायक) को 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदन की सदस्यता तुरंत प्रभाव से रद्द हो जाती है।उपचुनाव का फैसला
इसी नियम के तहत मध्य प्रदेश विधानसभा पहले ही राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त कर चुकी है। हालांकि, भारती ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया था, लेकिन वहां से अब तक न तो सुनवाई हो सकी है और न ही कोई स्टे मिला है। इसी कानूनी संकट के चलते चुनाव आयोग को यहाँ उपचुनाव कराने का फैसला लेना पड़ा। इस उपचुनाव में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसी विपक्षी दल से लड़ना नहीं, बल्कि अपने भीतर के असंतोष को संभालना है। पार्टी के सामने सही उम्मीदवार का चयन करना एक टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।मैदान में उतरे दिग्गज
कांग्रेस जहां अभी टिकट के भंवर में फंसी है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की रणनीति काफी साफ नजर आ रही है। मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और दतिया के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा कोर्ट का फैसला आते ही मैदान में उतर चुके हैं। राजनीतिक गलियारों में लगभग यह साफ माना जा रहा है कि बीजेपी यहाँ से नरोत्तम मिश्रा को ही अपना उम्मीदवार बनाएगी। यही वजह है कि पिछले करीब 3 महीनों से मिश्रा और उनके समर्थक लगातार क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं, जनता के बीच बने हुए हैं और चुनावी बिसात बिछा चुके हैं।फैसला अब दतिया के लोगों पर
दतिया का यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस के लिए अपनी साख बचाने और बीजेपी के लिए अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की बड़ी जंग है। अब देखना यह होगा कि 30 जुलाई को दतिया की जनता किसके वादों पर भरोसा जताती है।