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खाद दफ्तर पहुंचे परेशान किसान।
खाद दफ्तर पहुंचे परेशान किसान।
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खाद का संकट : 3.78 लाख किसानों में से सिर्फ 1.21 लाख की बनी आईडी 

प्रशासन का कदम प्रशासन ने रिकॉर्ड सुधारने और पंजीयन तेज करने के लिए विशेष शिविरों और हेल्पलाइन की व्यवस्था की है। हालांकि, पंजीकरण की धीमी रफ्तार के कारण खेती के पीक सीजन में किसान खाद के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
16 Jun 2026, 04:53 PM
मध्य प्रदेश

खरीफ सीजन शुरू होते ही कई जिलों में किसानों को खाद लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. सरकार ने खाद वितरण को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ई-विकास प्रणाली के तहत ऑनलाइन ई-टोकन व्यवस्था लागू की है. अब किसानों को खाद लेने के लिए पहले ऑनलाइन टोकन लेना पड़ता है और इसके साथ फार्मर आईडी (किसान आईडी) भी जरूरी कर दी गई है. यही नई व्यवस्था कई किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है.

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में करीब 3.78 लाख किसान हैं, लेकिन इनमें से केवल 1.21 लाख किसानों की ही फार्मर आईडी बनी है. वहीं सिर्फ 31.9 हजार किसानों का पंजीयन पूरा हो पाया है सबसे बड़ी समस्या उन किसानों के सामने आ रही है जिनकी जमीन का बंटवारा नहीं हुआ है या राजस्व रिकॉर्ड में नाम और पहचान की जानकारी मेल नहीं खाती. कई मामलों में खसरे में दर्ज नाम और पहचान पत्र के विवरण में अंतर होने के कारण फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है. ऐसे किसानों की शिकायत है कि वे समय पर खाद नहीं खरीद पा रहे हैं. नई व्यवस्था के तहत किसान को पहले ऑनलाइन टोकन लेना होगा.

फार्मर आईडी के लिए जरूरी दस्तावेज

फार्मर आईडी बनवाने के लिए किसान का पहचान नंबर, मोबाइल नंबर, बैंक खाते की जानकारी और भूमि से जुड़े दस्तावेज जरूरी हैं. जिन किसानों का रिकॉर्ड पूरी तरह अपडेट नहीं है, उन्हें पहले अपने दस्तावेज ठीक कराने होंगे. इसके लिए तहसील और राजस्व विभाग के कार्यालयों में आवेदन करना पड़ रहा है.

प्रशासन की पहल

किसानों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए प्रशासन ने हेल्पलाइन और विशेष शिविरों की व्यवस्था की है. अधिकारियों का कहना है कि जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है, वे शिविरों में जाकर दस्तावेजों की जांच और सुधार करा सकते हैं. साथ ही ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया को भी तेज किया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को नई व्यवस्था से जोड़ा जा सके 

लाभ बनाम वर्तमान की चुनौती

हालांकि सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था भविष्य में किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी, लेकिन फिलहाल फार्मर आईडी और पंजीयन की धीमी रफ्तार के कारण हजारों किसान खाद लेने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सभी पात्र किसानों का जल्द से जल्द पंजीयन पूरा कराया जाए, ताकि खेती के महत्वपूर्ण समय में उन्हें खाद की कमी न झेलनी पड़े.

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