छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शांत से गांव 'पुराना खर्वे' में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। यह सन्नाटा किसी शांति का नहीं, बल्कि एक गहरे और खौफनाक डर का है। पिछले चार महीनों से गांव में एक-एक कर हो रही मौतों ने जो दहशत पैदा की थी, वह अब एक भयानक साजिश के शक में बदल चुकी है।
गांव की 'गुड़ी' (चौपाल) पर जब कुछ बुजुर्गों ने बैठकर हाथों में कागज-कलम थामी और एक-एक कर मौतों की तारीखें जोड़नी शुरू कीं, तो सामने आए आंकड़ों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। महज 98 दिनों के भीतर गांव के 8 तंदुरुस्त पुरुषों की संदिग्ध मौत हो चुकी है, और इन सभी मौतों के तार गांव के ही एक किराना दुकानदार रामसाय जायसवाल से जुड़ते नजर आ रहे हैं।
'कार्तिक' के उस आखिरी दो घूंट ने खोल दिया मौत का मटका
ग्रामीणों का कहना है कि अगर बीती 14 मई को कार्तिक मांझी (प्रजापति) की जान चमत्कारिक रूप से न बचती, तो शायद इस खौफनाक सिलसिले का राज कभी सामने ही नहीं आता।
क्या हुआ था 14 मई को? गांव का ही एक युवक प्रमोद शराब खरीदकर लाया था। वह किराना दुकान पर रुका, जहां दुकानदार रामसाय जायसवाल ने किसी बहाने से शराब की बोतल ली और दुकान के भीतर चला गया।
10 मिनट का रहस्यमय खेल: करीब 10 मिनट तक दुकान के अंदर रहने के बाद रामसाय बाहर आया और बोतल वापस सौंप दी। दोपहर की चिलचिलाती धूप के कारण प्रमोद ने उस वक्त शराब नहीं पी और वह बोतल कार्तिक को दे दी।
दो घूंट और बेहोशी: कार्तिक ने जैसे ही उस शराब के सिर्फ दो घूंट गले से नीचे उतारे, उसे भयानक उल्टियां होने लगीं और वह कुछ ही मिनटों में तड़पकर बेहोश हो गया। अस्पताल में वक्त रहते मिले इलाज ने उसकी जान तो बचा ली, लेकिन उसने पूरे गांव की आंखें खोल दीं।
पैटर्न ऑफ मर्डर? हर मौत से पहले का 'वो' बुलावा
'नईदुनिया' की पड़ताल में ग्रामीणों ने एक बेहद चौंकाने वाले पैटर्न का खुलासा किया है। गांववालों के मुताबिक, जिन भी 8 लोगों की जान गई है, वे मरने से ठीक पहले किसी न किसी बहाने से दुकानदार रामसाय के संपर्क में आए थे:
कोई उसकी दुकान पर घंटों बैठा था।
किसी को उसने खुद आवाज देकर बुलाया था।
तो किसी को विशेष रूप से शराब लाने के लिए भेजा गया था।
शुरुआत में लोगों ने इसे सामान्य मौत या बीमारी माना, लेकिन अब बुजुर्गों का कहना है, "हमें लगा बीमारी होगी, लेकिन अब समझ आ रहा है कि गांव के भीतर कोई बहुत बड़ा पाप और गलत काम हो रहा था।"
अब कब्रों से निकलेगा सच: 7 लाशों का होगा 'एक्सह्यूमेशन'
इस मामले में पुलिस प्रशासन भी हरकत में आ चुका है। चूंकि मृतकों में से 7 लोगों के शवों को परंपरा के अनुसार दफनाया गया था, इसलिए अब कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में इन 7 कब्रों को खोदकर शवों को बाहर निकाला जाएगा।
फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों की टीम इन कंकालों/शवों का पोस्टमार्टम (Post-Mortem) और विसरा जांच करेगी, ताकि यह साफ हो सके कि क्या इन्हें धीमा जहर (स्लो पॉइजन) या शराब में कोई घातक रसायन मिलाकर दिया जा रहा था। फिलहाल पूरी तफ्तीश मंगलवार को आने वाली 'शॉर्ट पीएम रिपोर्ट' पर टिकी है।
शाम ढलते ही पसरा सन्नाटा, घरों में कैद हुए बच्चे
पुराना खर्वे गांव में इस वक्त अविश्वास का माहौल है। महिलाओं ने अपने बच्चों को अकेले घर से बाहर निकालना बंद कर दिया है। शाम ढलते ही गलियों में सन्नाटा पसर जाता है। ग्रामीणों ने डर के मारे एक-दूसरे के हाथ से पानी पीना और बाहर का कुछ भी खाना छोड़ दिया है। रोते बिलखते पीड़ित परिवारों का बस एक ही मलाल है—"अगर यह शक पहले हो जाता, तो शायद आज हमारे अपने जिंदा होते।"
मौत का कैलेंडर: 98 दिनों में उजड़ गए 8 घर
गांव की चौपाल (गुड़ी) पर ग्रामीणों द्वारा तैयार की गई मौतों की यह खौफनाक टाइमलाइन किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकती है:
| क्र. | मृतक का नाम | मौत की तारीख (2026) |
| 1. | बद्री पटेल | 06 फरवरी |
| 2. | बुठालू साहू | 20 फरवरी |
| 3. | बुधराम जायसवाल | 12 मार्च |
| 4. | छत्तूराम साहू | 20 मार्च |
| 5. | विनोद साहू | 31 मार्च |
| 6. | गजानंद मांझी | 28 अप्रैल |
| 7. | चैतूराम साहू | 29 अप्रैल |
| 8. | महेतरू साहू | 14 मई |
