छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार का 'सुशासन तिहार' केवल कागजी दावों या जनसंवाद का औपचारिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह आम जनता की आकांक्षाओं को रिकॉर्ड समय में पूरा करने का एक बेहद प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। राज्य शासन से लेकर जिला प्रशासन तक, आम नागरिकों की समस्याओं और मांगों के त्वरित निराकरण के लिए पूरी संवेदनशीलता और 'एक्शन मोड' में काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में, मुख्यमंत्री द्वारा अपने हालिया सरगुजा प्रवास के दौरान ग्रामीणों से किए गए वादों पर बिजली की गति से अमल शुरू हो गया है, जिसकी प्रशासनिक स्वीकृतियां भी जारी कर दी गई हैं।
जिला प्रशासन का त्वरित 'एक्शन' और लाखों के फंड को मंजूरी
ग्राम सिलमा (विकासखंड बतौली): * नवीन पंचायत भवन: डीएमएफ (Districts Mineral Foundation) और मनरेगा के अभिसरण (Convergence) से 18.30 लाख रुपये की लागत से निर्माण को मंजूरी।
नवीन पीडीएस (राशन) भवन: मनरेगा मद से 11.63 लाख रुपये की स्वीकृति, ताकि ग्रामीणों को राशन के लिए भटकना न पड़े।
मुक्तिधाम निर्माण: डीएमएफ मद से 2.50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत।
ग्राम कुनकुरीकला: * नवीन पंचायत भवन: यहाँ भी डीएमएफ और मनरेगा के अभिसरण से 18.30 लाख रुपये की लागत से हाईटेक पंचायत भवन के निर्माण को हरी झंडी मिल चुकी है।
ग्रामीणों का फूटा उत्साह
सुशासन की नई परिभाषा
राज्य सरकार की मंशा साफ है—योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय सीमा के भीतर पहुँचना चाहिए। जिला प्रशासन द्वारा सुशासन तिहार के दौरान प्राप्त हर एक आवेदन और मांग की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। सरगुजा में हुई यह त्वरित कार्रवाई इस बात का जीवंत उदाहरण है कि साय सरकार में 'फाइलें अटकती नहीं, बल्कि काम दिखते हैं।' इस पारदर्शी और समयबद्ध कार्यप्रणाली से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में सुशासन की अवधारणा अब सचमुच जमीन पर साकार हो रही है।
