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दोबारा खेत तैयार करने में जुटे किसान
दोबारा खेत तैयार करने में जुटे किसान
रायपुर संभाग

बारिश से पहली धान बोवाई प्रभावित, दूसरी जुताई कर फिर खेतों में उतरे किसान

आरंग विधानसभा क्षेत्र में तेज बारिश के कारण धान की पहली बोवाई प्रभावित हो गई। कई गांवों में बीज बहने और फसल खराब होने के बाद किसान अब दूसरी जुताई कर दोबारा धान बोवाई में जुट गए हैं। बढ़ती लागत और अतिरिक्त मेहनत के बावजूद किसानों का हौसला कायम है।

प्रकाशित: 13 Jul 2026, 06:17 PM · अपडेट: 30 Jul 2026, 09:52 AM
आरंग
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
खरीफ सीजन में अच्छी फसल की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को इस बार मौसम की मार झेलनी पड़ रही है। बीते दिनों हुई तेज बारिश ने आरंग विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में धान की पहली बोवाई को प्रभावित कर दिया। मंदिरहसौद, चंदखुरी, लखौली, कोसरंगी, भैंसा, अटल नगर, समोदा सहित आसपास के इलाकों में कई खेतों में बीज बह गए, जबकि कुछ जगहों पर अंकुरित फसल पानी भरने से खराब हो गई।

दोबारा खेत तैयार करने में जुटे किसान

पहली बोवाई खराब होने के बाद किसान अब दूसरी बार खेतों में उतर गए हैं। सुबह से शाम तक खेतों में हल और ट्रैक्टर चलते नजर आ रहे हैं। किसान दोबारा जुताई कर मिट्टी को तैयार कर रहे हैं, ताकि समय रहते धान की नई बोवाई पूरी की जा सके। कई छोटे किसान आज भी बैल-हल के सहारे खेती की तैयारी कर रहे हैं, वहीं बड़े किसान ट्रैक्टरों से खेतों की जुताई करा रहे हैं। दूसरी जुताई से मिट्टी नरम हो रही है, खरपतवार खत्म हो रहे हैं और खेत दोबारा बोवाई के लिए तैयार हो रहे हैं। 

पहली फसल खराब होने से बढ़ा आर्थिक बोझ 

मंदिरहसौद क्षेत्र के किसान रामलाल साहू ने बताया कि पहली बोवाई के दौरान बीज, खाद और मजदूरी पर काफी खर्च हुआ था, लेकिन तेज बारिश ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। अब दोबारा बीज खरीदने और खेत तैयार करने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है। वहीं महिला किसान सरोज ने बताया कि पहली फसल खराब होने से परिवार की चिंता बढ़ गई थी, लेकिन खेती छोड़ना संभव नहीं है। इसी उम्मीद के साथ पूरा परिवार फिर से खेतों में काम करने उतर गया है।

बेहतर अंकुरण के लिए की जा रही दूसरी जुताई 

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बारिश के कारण कई खेतों में पानी भर गया था। अब पानी निकलने के बाद दूसरी जुताई जरूरी हो गई है, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहे और दोबारा बोए गए बीजों का अंकुरण बेहतर हो सके। किसान भी मौसम का साथ मिलने की उम्मीद में जल्द से जल्द बोवाई पूरी करने में जुटे हैं। 

किसानों ने की मदद और मुआवजे की मांग 

किसानों का कहना है कि दोबारा बोवाई से बीज, खाद, डीजल और मजदूरी का खर्च बढ़ गया है। जिन किसानों के पास पहले खरीदा गया बीज खराब हो गया, उन्हें अब बाजार से नए बीज खरीदने पड़ रहे हैं। ऐसे में किसानों ने प्रशासन से फसल नुकसान का सर्वे कर सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

मेहनत और उम्मीद के सहारे आगे बढ़ रहे अन्नदाता 

ग्रामीण इलाकों में दोबारा बोवाई का यह दौर किसानों के संघर्ष और जज्बे को दिखा रहा है। खेतों में बैलों के साथ जुटे किसान और परिवार के सदस्यों का सहयोग यह बताता है कि बारिश ने भले ही उनकी पहली मेहनत को नुकसान पहुंचाया हो, लेकिन खेती के प्रति उनका भरोसा अब भी कायम है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल रहेगा और इस बार की फसल उनकी मेहनत का बेहतर परिणाम देगी।

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