छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकलकर अब बदलाव की एक नई कहानी लिखी जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित जिला पुनर्वास केंद्र में रह रहे 113 आत्मसमर्पित युवा—जिनमें 42 महिलाएं और 71 पुरुष शामिल हैं—अब पूरी तरह से नई जिंदगी की ओर बढ़ चुके हैं। कभी जंगलों में हथियारों के साथ भटकने वाले ये युवा अब “भारत माता की जय” के नारों के साथ समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की मिसाल बन रहे हैं। पुनर्वास केंद्र में इन युवाओं का जीवन अब पूरी तरह अनुशासित और सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ चुका है। सुबह की शुरुआत बागवानी और साफ-सफाई से होती है, जिसके बाद सभी मिलकर भोजन तैयार करते हैं। शिक्षा के लिए दो विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की गई है, जो इन्हें प्रतिदिन अक्षर ज्ञान, बुनियादी गणित और अंग्रेजी की शिक्षा देते हैं।
वॉलीबॉल ने ली पहचान
पुनर्वास केंद्र में सबसे सकारात्मक बदलाव खेल गतिविधियों में देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप जब युवाओं से उनकी रुचि पूछी गई तो अधिकतर ने वॉलीबॉल को चुना। इसके बाद प्रशासन ने खेल गतिविधियां शुरू कराईं, जिसमें युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कभी हथियार उठाने वाले ये हाथ अब वॉलीबॉल को संभालकर मैदान में अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। ओयाम जोगा, वेको हुंगा और सोड़ी सोमड़ी जैसे युवा अब खेल के जरिए आत्मविश्वास और खुशी की नई पहचान बना रहे हैं। दिनभर की गतिविधियों और खेल के बाद शाम को संगीत और मनोरंजन सत्र आयोजित किए जाते हैं, जिससे युवाओं का मानसिक विकास भी हो रहा है।
पुनर्वास का एक प्रेरक
सुकमा का यह पुनर्वास मॉडल यह साबित करता है कि सही मार्गदर्शन, संवेदनशील प्रशासन और अवसर मिलने पर भटके हुए युवा भी समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं। यह पहल न केवल सुकमा बल्कि पूरे देश के लिए एक सकारात्मक और अनुकरणीय उदाहरण के रूप में सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सल प्रभावित पृष्ठभूमि से लौटकर अब एक सकारात्मक बदलाव की मजबूत तस्वीर सामने आ रही है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित जिला पुनर्वास केंद्र में रह रहे 113 आत्मसमर्पित युवा—जिनमें 42 महिलाएं और 71 पुरुष शामिल हैं—अब पूरी तरह नई जीवनशैली की ओर बढ़ चुके हैं। कभी जंगलों में हथियारों के साथ भटकने वाले ये युवा आज अनुशासन, शिक्षा और विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।अनुशासित दिनचर्या
पुनर्वास केंद्र में इन युवाओं का दैनिक जीवन अब पूरी तरह व्यवस्थित और सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ चुका है। सुबह की शुरुआत बागवानी और साफ-सफाई से होती है, जिसके बाद सभी युवा मिलकर भोजन तैयार करते हैं। यह सामूहिक जीवन उन्हें टीमवर्क और जिम्मेदारी का एहसास कराता है। शिक्षा को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने दो विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की है, जो प्रतिदिन सुबह और शाम इन्हें अक्षर ज्ञान, बुनियादी गणित और अंग्रेजी की शिक्षा दे रहे हैं। इससे युवाओं में सीखने की रुचि और आत्मविश्वास दोनों बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही प्रशासन कलेक्ट्रेट के सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से इन सभी के आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड और वोटर आईडी जैसे जरूरी दस्तावेज प्राथमिकता से तैयार कर रहा है।
खेल मैदान में बदलती पहचान
पुनर्वास केंद्र में सबसे सकारात्मक और प्रेरणादायक बदलाव खेल गतिविधियों में देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत जब इन युवाओं से उनकी रुचि पूछी गई तो अधिकांश ने वॉलीबॉल खेल को प्राथमिकता दी। इसके बाद प्रशासन ने नियमित खेल प्रतियोगिताओं की शुरुआत की, जिसमें युवक-युवतियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। कभी हथियार उठाने वाले हाथ अब वॉलीबॉल को पकड़कर मैदान में अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। ओयाम जोगा, वेको हुंगा और सोड़ी सोमड़ी जैसे युवा अब खेल के माध्यम से आत्मविश्वास हासिल कर रहे हैं और मानसिक रूप से भी मजबूत बन रहे हैं।
