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धमतरी में दूध से समृद्धि की नई कहानी
धमतरी में दूध से समृद्धि की नई कहानी
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धमतरी में डेयरी क्रांति : 6 हजार किसान परिवारों की बदली जिंदगी, महिलाएं बनीं उद्यमी

छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला अब धान उत्पादन के साथ डेयरी क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। जिला प्रशासन, एनडीडीबी और पशुपालकों के संयुक्त प्रयासों से दूध उत्पादन, संग्रहण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में प्रतिदिन 10 से 15 हजार लीटर दूध संग्रहित हो रहा है, जिसे 20 हजार लीटर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। महिला पशुपालकों और दुग्ध समितियों की भागीदारी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
22 Jul 2026, 11:48 AM
रायपुर
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले को अब तक मुख्य रूप से 'धान के कटोरे' के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज यह जिला ग्रामीण समृद्धि और आर्थिक स्वावलंबन का एक नया अध्याय लिख रहा है। कभी व्यक्तिगत और असंगठित स्तर तक सीमित रहने वाला दूध का कारोबार आज जिला प्रशासन, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और स्थानीय पशुपालकों के सामूहिक प्रयासों से एक संगठित आंदोलन का रूप ले चुका है। यह बदलाव केवल दैनिक दूध उत्पादन बढ़ाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक पशुपालन, सहकारी निष्ठा और नारी शक्ति के उस अनूठे संगम की मिसाल है, जो गांव-गांव में खुशहाली की नई राहें खोल रहा है।

धमतरी का सफल डेयरी मॉडल

धमतरी में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 10 से 15 हजार लीटर दूध का संग्रहण हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 20 हजार लीटर प्रतिदिन पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। यह
धमतरी में डेयरी क्रांति से जुड़ी महिला पशुपालक
आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि जिले के 5 से 6 हजार किसान परिवारों और विशेषकर महिला पशुपालकों के जीवन को संवारने का जरिया है। ​दूध की कीमतें 35-40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। समितियों के माध्यम से पारदर्शी व्यवस्था, डिजिटल भुगतान और सीधे बैंक खातों में पैसे पहुंचने से पशुपालकों को उनकी मेहनत का पूरा और समय पर मूल्य मिल रहा है, जिससे डेयरी व्यवसाय के प्रति ग्रामीण समुदाय का भरोसा लगातार गहरा हुआ है। ​धमतरी के इस डेयरी मॉडल का सबसे मजबूत स्तंभ सहकारिता की भावना है। कुछ समय पहले तक जो दुग्ध समितियां सुप्त या निष्क्रिय पड़ी थीं, उन्हें विशेष अभियान चलाकर पुनर्जीवित किया गया। आज जिले में 68 से अधिक सक्रिय दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां गतिशील हैं। गांव-गांव में फैले इस नेटवर्क के जरिए दूध का वैज्ञानिक परीक्षण, संग्रहण और व्यवस्थित विपणन संभव हो सका है, जिसने बिचौलियों की भूमिका खत्म कर सीधे किसानों को लाभान्वित किया है।

महिलाओं ने बदली डेयरी की तस्वीर

​धमतरी की श्वेत क्रांति की सबसे खूबसूरत तस्वीर यह है कि इसकी बागडोर महिलाओं के हाथों में है। स्वयं सहायता समूहों और महिला दुग्ध समितियों के जरिए जुड़कर महिलाएं अब केवल घरेलू पशुपालक नहीं, बल्कि सफल डेयरी उद्यमी बन रही हैं। एनडीडीबी के सहयोग से जिले की 43 महिला दुग्ध उत्पादकों को झारखंड के सफल डेयरी मॉडल का अध्ययन कराया गया, जहाँ उन्होंने स्वच्छ दुग्ध उत्पादन और सहकारी प्रबंधन के गुर सीखे। इसी कड़ी में जिले के 19 प्रगतिशील किसानों और समिति पदाधिकारियों को अमूल की जन्मभूमि गुजरात के मेहसाणा (MIT) भेजा गया, ताकि वे उन्नत नस्ल सुधार और आधुनिक प्रोसेसिंग तकनीकों को समझ सकें। गुजरात और झारखंड से आधुनिक अनुभव लेकर लौटीं ये महिलाएं और किसान आज धमतरी के अन्य ग्रामीणों के लिए प्रेरणास्रोत और 'मास्टर ट्रेनर' की भूमिका निभा रहे हैं।

दूध उत्पादन से आगे बढ़ा धमतरी

उत्पादन और संग्रहण को मजबूती देने के बाद अब जिले में दूध के मूल्य संवर्धन (Value Addition) पर तेजी से काम हो रहा है। सेमरा-बी, भाठागांव और मुजगहन में चिलिंग प्लांट पहले से कार्यरत हैं, जबकि कुरूद क्षेत्र के लिए नए प्लांट को हरी झंडी मिल चुकी है। जिले के छाती क्षेत्र में एक विशाल और आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट आकार ले रही है। इसके शुरू होते ही स्थानीय स्तर पर दूध की प्रोसेसिंग के साथ-साथ दही, पनीर, मक्खन और पैकेज्ड मिल्क तैयार किया जा सकेगा। इससे न केवल परिवहन लागत घटेगी, बल्कि धमतरी का अपना डेयरी ब्रांड विकसित होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ​जिला कलेक्टर की सोच के अनुरूप, इस डेयरी क्रांति का दायरा केवल धमतरी या कुरूद तक सीमित नहीं है। इसका विस्तार वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों जैसे नगरी और मगरलोड के गांवों तक किया जा रहा है। उन्नत नस्ल सुधार (कृत्रिम गर्भाधान), नियमित टीकाकरण, संतुलित पशुआहार और पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से आर्थिक सहायता देकर अंतिम व्यक्ति तक इस योजना का लाभ पहुंचाया जा रहा है।
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