छत्तीसगढ़ के भिलाई से साइबर ठगी का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने कॉर्पोरेट जगत और पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। शातिर साइबर अपराधियों ने नामी ऑटोमोबाइल कंपनी 'साईराम व्हील्स प्राइवेट लिमिटेड' को अपना निशाना बनाते हुए महज कुछ घंटों के भीतर 20 लाख रुपए पार कर दिए। ठगों ने इस वारदात को इतनी चालाकी से अंजाम दिया कि कंपनी के अनुभवी अकाउंटेंट भी धोखा खा गए।
फिलहाल, पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता और कंपनी के डायरेक्टर यश बत्रा ने सुपेला और वैशाली नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस को बताया कि उनकी कंपनी के शोरूम दुर्ग, भिलाई, रायपुर और राजनांदगांव जैसे बड़े शहरों में फैले हुए हैं। इस पारिवारिक व्यवसाय में उनके पिता श्रीचंद बत्रा और मां ज्योति बत्रा भी बतौर डायरेक्टर शामिल हैं।
हाल ही में डायरेक्टर श्रीचंद बत्रा अपनी बहन से मिलने ऑस्ट्रेलिया गए हुए थे। ठगों ने शायद इसी मौके का फायदा उठाया और उनके विदेश में होने के दौरान इस पूरी साजिश को अंजाम दिया।
13 साल का भरोसा और एक 'फर्जी' व्हाट्सएप मैसेज
कंपनी के चारों ब्रांचों के करोड़ों रुपए के लेन-देन की जिम्मेदारी पिछले 13 वर्षों से उनके सबसे भरोसेमंद अकाउंटेंट मेष पटेल संभाल रहे हैं। आमतौर पर कंपनी में भुगतान के लिए एक सख्त प्रोटोकॉल है, जिसके तहत डायरेक्टर्स और अकाउंटेंट के व्हाट्सएप ग्रुप पर मंजूरी मिलने के बाद ही कोई ट्रांजेक्शन किया जाता है।
वारदात का लाइव घटनाक्रम:
21 मई, दोपहर 3:21 बजे: अकाउंटेंट मेष पटेल के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आता है। इस नंबर की प्रोफाइल पिक्चर (DP) पर हूबहू डायरेक्टर श्रीचंद बत्रा की फोटो लगी हुई थी।
शातिर चाल: ठग ने खुद को श्रीचंद बत्रा बताते हुए अकाउंटेंट को एक HDFC बैंक खाते की डिटेल भेजी और उसे कंपनी के SBI करंट अकाउंट में 'बेनिफिशियरी' के रूप में तुरंत जोड़ने को कहा।
भरोसे में आया अकाउंटेंट: अकाउंटेंट ने औपचारिकता के लिए पूछा कि क्या इसे साईराम व्हील्स के खाते से जोड़ना है? सामने से 'हां' का जवाब आते ही और 20 लाख रुपए भेजने का निर्देश मिलते ही, अकाउंटेंट ने शाम 4:55 बजे रकम ट्रांसफर कर दी।
अगले दिन खुली आंखें: जब मांगी 48 लाख की और रकम
साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि 20 लाख रुपए डकारने के अगले ही दिन, यानी 22 मई को उन्होंने उसी फर्जी नंबर से अकाउंटेंट को दोबारा मैसेज किया। इस बार ठगों ने 48 लाख रुपए और ट्रांसफर करने की डिमांड रख दी। इतनी बड़ी रकम की दोबारा मांग होने पर अकाउंटेंट को थोड़ा संदेह हुआ।
अकाउंटेंट ने तुरंत दूसरे डायरेक्टर यश बत्रा से संपर्क कर इस भुगतान की पुष्टि करनी चाही। यश बत्रा ने बिना देर किए ऑस्ट्रेलिया में मौजूद अपने पिता श्रीचंद बत्रा को इंटरनेशनल कॉल लगाया। पिता ने जैसे ही कहा कि "मैंने तो कोई पैसा नहीं मांगा और न ही कोई मैसेज किया", वैसे ही कंपनी के दफ्तर में सन्नाटा पसर गया। सबको समझ आ चुका था कि वे एक बहुत बड़ी साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
पुलिस एक्शन और ताजा अपडेट: BNS की नई धाराओं में केस दर्ज
ठगी का अहसास होते ही कंपनी प्रबंधन ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत केंद्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद वैशाली नगर और सुपेला थाना पुलिस को लिखित आवेदन दिया गया।
ताजा अपडेट: पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात मोबाइल नंबर और संबंधित HDFC बैंक खाताधारक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (जालसाजी और ठगी) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस की साइबर सेल अब उस बैंक खाते को फ्रीज कराने की कोशिश कर रही है जिसमें पैसे ट्रांसफर हुए थे, साथ ही उस व्हाट्सएप नंबर की लोकेशन और आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रेस किया जा रहा है।
साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह: 'CEO फ्रॉड' से ऐसे बचें
यह मामला कॉर्पोरेट जगत में बढ़ते 'CEO Fraud' या 'Whaling Attack' का एक क्लासिक उदाहरण है, जहां सीनियर अधिकारियों की फर्जी पहचान बनाकर कर्मचारियों को ठगा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे बचने के लिए:
व्हाट्सएप या ईमेल पर डीपी (DP) देखकर कभी भी पैसों का लेन-देन न करें।
कोई भी बड़ा ट्रांजेक्शन करने से पहले संबंधित अधिकारी को सीधे नॉर्मल वॉयस कॉल कर आवाज की पुष्टि जरूर करें।
विदेशी दौरों की जानकारी सोशल मीडिया पर पब्लिक करने से बचें, क्योंकि ठग इसी का फायदा उठाते हैं।
