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Villagers protest following negligence at health center
Villagers protest following negligence at health center
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Ganeshpur Health Center: स्वास्थ्य केंद्र में ताला रास्ते में प्रसव के बाद नवजात की मौत, ग्रामीणों का हंगामा, बीएमओ-नर्स सस्पेंड

Ganeshpur Health Center: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के रामानुजनगर विकासखंड स्थित गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कथित लापरवाही के कारण प्रसूता को समय पर इलाज नहीं मिल सका। अस्पताल से लौटते समय रास्ते में महिला का प्रसव हुआ, जिसमें नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम किया। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश पटेल और नाइट ड्यूटी पर तैनात सेकेंड एएनएम प्रमिला गिरी को निलंबित कर दिया।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 16 Oct 2026, 08:11 AM · 4 मिनट पढ़ने का समय
रामानुजनगर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Ganeshpur Health Center: छत्तीसगढ़ के रामानुजनगर विकासखंड अंतर्गत आने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गणेशपुर में एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल में ताला बंद होने और मौके पर किसी भी स्टाफ के मौजूद न मिलने के कारण एक प्रसूता को समय पर इलाज नहीं मिल सका। अस्पताल से लौटते वक्त रास्ते में ही महिला का प्रसव हो गया, जिसके बाद नवजात शिशु की मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने अस्पताल के सामने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्स को निलंबित कर दिया है।

क्या है पूरा मामला? 

यह पूरी घटना गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की है। जानकारी के मुताबिक, 14 अक्टूबर की रात ग्राम पवनपुर की एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन तुरंत उसे लेकर गणेशपुर अस्पताल पहुंचे। जब वे वहां पहुंचे तो मुख्य अस्पताल भवन में ताला लटका हुआ था। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में ही बने स्टाफ नर्स के क्वार्टर का दरवाजा खटखटाया। आरोप है कि काफी देर तक लगातार दरवाजा पीटने के बाद भी अंदर से कोई नहीं उठा। मजबूरन परिजन महिला को लेकर रामानुजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही महिला का प्रसव हो गया। इस दौरान अत्यधिक कमजोरी और सदमे से महिला बेसुध हो गई और नवजात शिशु ने दम तोड़ दिया।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, सड़क पर किया आंदोलन 

इस अमानवीय लापरवाही से गुस्साए ग्रामीण और पीड़ित परिवार के लोग सुबह-ससुबह गणेशपुर अस्पताल के सामने जमा हो गए और सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। वे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े थे। स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना मिलती, उससे पहले ही मामले की भनक कलेक्टर तक पहुंच चुकी थी। कलेक्टर ने फौरन संज्ञान लेते हुए एसडीएम को मौके पर रवाना किया और प्राथमिक जांच कर रिपोर्ट मांगी।

कलेक्टर के निर्देश पर त्वरित एक्शन

कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम सुनील अग्रवाल तुरंत गणेशपुर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद व्यवस्थाओं का जायजा लिया, पूछताछ की और रिपोर्ट सीधे कलेक्टर को भेजी।

इसके साथ ही, एसडीएम और स्थानीय थानेदार ने आंदोलन कर रहे ग्रामीणों को समझाने का प्रयास शुरू ही किया था कि प्रशासन की ओर से कड़ा कदम उठाते हुए बड़ा आदेश जारी कर दिया गया। कलेक्टर के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने:

  • डॉ. राजेश पटेल (प्रभारी चिकित्सा अधिकारी) और

  • प्रमिला गिरी (नाइट ड्यूटी पर तैनात सेकेंड एएनएम)

को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश की कॉपी सामने आने और अधिकारियों द्वारा उचित कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम समाप्त किया।

सुविधाएं भरपूर, परवान चढ़ रही है लापरवाही 

ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि गणेशपुर का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामानुजनगर मुख्यालय से दूर एक पहाड़ी और महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित है। शासन की ओर से यहां किसी भी चीज की कमी नहीं छोड़ी गई है। अस्पताल की बिल्डिंग से लेकर स्टाफ के रहने के लिए एसी कमरे तक बनाए गए हैं। यहां तक कि पेयजल की भी कोई समस्या नहीं है। बावजूद इसके, जमीनी हकीकत इसके उलट है। आरोप है कि डॉक्टर या अन्य स्टाफ यहाँ रुकना ही नहीं चाहते। अस्पताल में दो स्टाफ नर्सों की पोस्टिंग है, जो सिर्फ उन्हीं के भरोसे संचालित होता है। डॉक्टर कभी-कभार एक-दो घंटे के लिए आते हैं, अपनी हाजिरी लगाते हैं और वापस लौट जाते हैं। स्टाफ क्वार्टर और कमरे अक्सर बंद ही रहते हैं। क्षेत्र के लोगों का यह भी मानना है कि इस तरह की लापरवाही के लिए निचले स्तर के स्टाफ के साथ-साथ बीएमओ (BMO) और सीएमएचओ (CMHO) भी कम जिम्मेदार नहीं हैं, जो शायद ही कभी ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों का औचक निरीक्षण करने पहुंचते हैं। बहरहाल, इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप जरूर मच गया है।

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