क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी अब केवल इंसानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर वन्य जीवों के व्यवहार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जंगलों और पेड़ों में पानी और भोजन की भारी कमी के कारण बंदरों के झुंड अब लगातार रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि गांवों में घरों की क्यारियां, छतें और आंगन बंदरों की अस्थायी शरणस्थली बनते जा रहे हैं।
सुबह से लेकर शाम तक बंदरों की उछल-कूद और उत्पात से ग्रामीणों का सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है। कई जगहों पर बंदरों के झुंड अचानक घरों में घुस आते हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन जाता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी ज्यादा परेशानी भरी साबित हो रही है।
मानवीय पहल: बंदरों के लिए पानी की विशेष व्यवस्था
समाजसेवी डॉ. वाय. के. जैन ने बताया कि बढ़ती गर्मी को देखते हुए उनके घर में बंदरों के लिए पानी की विशेष व्यवस्था की गई है। क्यारी में रखे गए पानी को बंदर आकर पीते हैं और अपनी प्यास बुझाते हैं। हालांकि, कई बार पानी पीने के बाद वे आसपास लगी सब्जियों, फूलों और फलदार पौधों को नुकसान भी पहुंचा देते हैं। इसके बावजूद मानवीय संवेदनाओं के तहत वन्य जीवों के लिए यह व्यवस्था लगातार जारी है।
महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार बंदरों के डर से महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे अधिक परेशान हैं। बच्चे अब बाहर खेलने से कतराने लगे हैं, जबकि छतों पर कपड़े सुखाना और आंगन में बैठना भी मुश्किल हो गया है। बंदरों की अचानक आवाजाही और आक्रामक व्यवहार के कारण लोगों में लगातार भय का माहौल बना हुआ है।प्रशासन से ठोस कदम की मांग
डॉ. जैन ने प्रशासन और वन विभाग से अपील की है कि गर्मी के इस मौसम को देखते हुए जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में वन्य जीवों के लिए पानी और भोजन की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। साथ ही ग्रामीण इलाकों में बढ़ रहे बंदरों के आतंक से राहत दिलाने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाने की जरूरत है, ताकि इंसान और वन्य जीवों के बीच संतुलन बना रहे और दोनों सुरक्षित रह सकें।
