आदिवासी अंचलों में सरकार की ओर से विकास के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी कई सवाल खड़े कर रही है। करोड़ों रुपये की योजनाओं और सरकारी घोषणाओं के बाद भी कई गांवों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। कहीं आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पक्के भवन नहीं हैं, तो कहीं सड़क बनने के बाद भी पुल का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि योजनाओं की मंजूरी तो मिल जाती है, लेकिन निर्माण और क्रियान्वयन में देरी के कारण इसका वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक समय पर नहीं पहुंच पाता।
झोपड़ी में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र
गरियाबंद के आदिवासी विकासखंड मैनपुर क्षेत्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो बच्चों की सुरक्षा और सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल रही है। सरगीगुड़ा ग्राम पंचायत के टेकनपारा में खेतों के बीच सड़क किनारे बनी एक छोटी सी झोपड़ी में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किया जा रहा है। जहां बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए, वहां मासूमों को असुरक्षित माहौल में बैठना पड़ रहा है।
अब भी जुगाड़ के सहारे
कुल 1,525 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से बड़ी संख्या में केंद्र अभी भी स्थायी भवन के अभाव से जूझ रहे हैं। जानकारी के अनुसार जिले में 209 केंद्र किराए के भवनों में, 91 केंद्र अन्य शासकीय भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। वहीं 81 आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं, जिन्हें जुगाड़ व्यवस्था के सहारे चलाया जा रहा है। प्रशासन इसे सामुदायिक सहयोग के रूप में देख रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह व्यवस्था कई बार बच्चों की सुविधाओं और सुरक्षा के लिए चुनौती बन जाती है।

सड़क बनी, लेकिन पुल नहीं बना
गरियाबंद जिले के साल्हेभांटा क्षेत्र के बनवापारा से खासरपारा तक जनमन योजना के तहत पक्की सड़क का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन पुल नहीं बनने से यह सड़क ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। बारिश के मौसम में खासरपारा नाले में पानी भर जाने से लोगों का आवागमन प्रभावित हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है। नाले में पानी बढ़ने के बाद बच्चों को कई बार कमर तक पानी पार कर स्कूल जाना पड़ता है।
158 लाख की मंजूरी, टेंडर प्रक्रिया जारी
पुल निर्माण को लेकर PMGSY के कार्यपालन अभियंता अभिषेक पाटकर ने बताया कि खासरपारा नाले पर 30 मीटर लंबे पुल निर्माण के लिए 158 लाख रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। वर्तमान में इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। पुल बनने के बाद ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को बारिश के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का समाधान अब जल्द होना चाहिए, ताकि विकास योजनाओं का लाभ वास्तव में आदिवासी क्षेत्रों के लोगों तक पहुंच सके।