India at United Nations: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों को लेकर चिंता जताई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सभी देशों से संयम बरतने, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा व व्यापार के सुचारु प्रवाह को बनाए रखने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि किसी भी युद्ध या संघर्ष का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी आर्थिक और मानवीय चुनौतियां पूरी दुनिया को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चलने वाली शत्रुताएं वैश्विक स्थिरता, विकास और सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं।
विदेश मंत्री ने रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि यह संघर्ष अभी भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस रुख को दोहराया जिसमें युद्ध समाप्त करने और बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने की बात कही गई है।
खाड़ी और समुद्री सुरक्षा पर जोर
जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात पहले से कठिन परिस्थितियों को और जटिल बना रहे हैं। समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र से लेकर लाल सागर और काला सागर तक व्यापारिक जहाजों और नाविकों पर होने वाले हमले स्वीकार नहीं किए जा सकते। उन्होंने खाद्य और ऊर्जा संसाधनों की स्थिर आपूर्ति के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद वितरण व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर बल दिया।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख
विदेश मंत्री ने आतंकवाद को वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेगा। जयशंकर ने कहा कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों और संस्थाओं को जवाबदेह ठहराना जरूरी है। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने और इसके नेटवर्क को उजागर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई।वैश्विक संकटों पर भारत की भूमिका
जयशंकर ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया वित्त, बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला और तकनीक जैसे क्षेत्रों के इस्तेमाल को लेकर नई चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि कई देश इन जोखिमों को कम करने के लिए अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों में विविधता ला रहे हैं। उन्होंने वैश्विक दक्षिण (Global South) के सामने खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक उपलब्धता और वित्तीय स्थिरता से जुड़े चार प्रमुख संकटों का उल्लेख किया।
भारत की विकास साझेदारी का जिक्र
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की विकास यात्रा ने देश की बड़ी आबादी के जीवन स्तर में सुधार किया है। उन्होंने बताया कि भारत 78 देशों में बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में करीब 600 प्रमुख विकास परियोजनाओं पर काम कर रहा है।AI को लेकर भारत का दृष्टिकोण
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि हर देश को अपनी जरूरतों और प्राथमिकताओं के अनुसार एआई मॉडल और रणनीतियां विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण के साथ अपनी साझेदारी में एआई को भी शामिल करेगा। उन्होंने एआई को मानव सशक्तिकरण, आर्थिक विकास और बड़े स्तर की समस्याओं के समाधान में मदद करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

