झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में धांधली के आरोपों को लेकर उठ रही विरोध की आवाज अब और बुलंद हो गई है। आंदोलन के 14वें दिन देर रात सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। बातचीत का कोई नतीजा न निकलने से नाराज अभ्यर्थियों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस लिखित फैसला नहीं होता, तब तक यह प्रदर्शन खत्म नहीं होगा। सरकारी पहल के बाद देर रात छात्र प्रतिनिधिमंडल और शासन के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई।
बैठक के बाद भी नहीं निकला रास्ता
छात्रों ने भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने, पूरी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और एक समयबद्ध (टाइम-बाउंड) भर्ती कैलेंडर जारी करने जैसी बुनियादी शर्तें सामने रखीं। हालांकि, घंटों चली इस मैराथन बैठक के बाद भी सहमति का कोई रास्ता नहीं निकल सका। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार अब तक सिर्फ कोरे आश्वासन देती आई है, लेकिन अब उन्हें कागजी वादों की जगह जमीनी स्तर पर लिखित और समयबद्ध कार्रवाई चाहिए।
अपनी रणनीति का करेंगे बड़ा खुलासा
छात्रों के मुताबिक, इस निष्फल बातचीत के बाद वे अपनी आगे की रणनीति का जल्द ही बड़ा खुलासा करेंगे। राजधानी में हो रही लगातार बारिश भी प्रदर्शनकारियों के इरादों को डिगा नहीं पा रही है। प्रतिकूल मौसम के बावजूद छात्र धरना स्थल पर जमे हुए हैं। इस बीच आंदोलन को सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का भी सहारा मिलने लगा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देर रात रांची में डटे छात्रों के लिए रेनकोट और जरूरी राहत सामग्री भिजवाई है। खबर है कि CJP का केंद्रीय नेतृत्व आज खुद रांची पहुंचकर छात्रों से मुलाकात करेगा और उनके रुख का समर्थन करेगा।निष्पक्ष जांच कराने की मांग
JPSC-JSSC भर्ती धांधली का मामला अब महज छात्रों का आंदोलन न रहकर झारखंड की राजनीति का केंद्र बिंदु बन चुका है। विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा और निष्पक्ष जांच कराने की मांग को जोर-शोर से उठाया। देर रात की बातचीत टूटने के बाद अब पूरे राज्य की नजरें शासन के अगले रुख पर टिकी हैं। अगर प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस और पारदर्शी समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में यह जनआक्रोश पूरे राज्य में और उग्र रूप ले सकता है।