इस साल जून का महीना देश के लिए सबसे सूखे जून महीनों में शामिल हो गया है। मौसम के आंकड़ों के अनुसार, साल 1927 के बाद यह तीसरा मौका है जब जून में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। महीने के आखिरी दिन तक देशभर में औसतन 42 फीसदी कम वर्षा हुई है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशांत महासागर में सक्रिय एल-नीनो का असर भारतीय मानसून पर दिखाई देने लगा है। इसी वजह से मानसून की रफ्तार धीमी रही और कई राज्यों में उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई।
सामान्य से काफी कम हुई बारिश
जून में देशभर में औसतन 92.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर इस महीने 157.7 मिलीमीटर वर्षा होती है। यदि महीने के अंतिम दिन कुछ इलाकों में अच्छी बारिश भी होती है, तब भी कुल वर्षा करीब 100 मिलीमीटर तक ही पहुंचने का अनुमान है।
यह आंकड़ा सामान्य से काफी कम माना जा रहा है।
100 साल में तीसरी बार सबसे सूखा जून
मौसम के पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले लगभग 100 वर्षों में जून का महीना सिर्फ तीन बार इतना सूखा रहा है।
साल 2009 में जून के दौरान 87.5 मिलीमीटर बारिश हुई थी।
साल 2014 में 92.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी।
अब वर्ष 2026 भी सबसे कम बारिश वाले जून महीनों की सूची में शामिल हो गया है।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा कमी
इस बार सबसे अधिक असर मध्य भारत में देखा गया है। यहां सामान्य से 54 फीसदी कम बारिश हुई है।
इसके अलावा पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 41 फीसदी, उत्तर-पश्चिम भारत में 30 फीसदी और दक्षिण भारत में 28 फीसदी वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
लगातार कम बारिश का असर खेती, जल स्रोतों और मौसम के संतुलन पर भी पड़ सकता है।
जुलाई से बदल सकता है मौसम
मौसम विभाग ने राहत भरी खबर भी दी है। विभाग का कहना है कि जुलाई के पहले सप्ताह से मानसून फिर सक्रिय होने की संभावना है।
मध्य भारत समेत देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है। इससे किसानों को राहत मिलने के साथ खरीफ फसलों की बुवाई में भी तेजी आने की उम्मीद है।
क्या है एल-नीनो
एल-नीनो एक ऐसी मौसमीय स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है।
भारत में इसका प्रभाव मानसून पर भी देखा जाता है। इससे बारिश की मात्रा कम हो सकती है और मानसून की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार एल-नीनो का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। इसी वजह से मानसून सामान्य गति से आगे नहीं बढ़ पाया और जून के अधिकांश दिनों में देशभर में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। हालांकि जुलाई में बारिश बढ़ने की संभावना से हालात में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।