नगर निगम की एक टेंडर प्रक्रिया को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। नगर निगम के तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन ने पूर्व महापौर रामशरण यादव पर 1 करोड़ 15 लाख रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगाया है।
शिकायत में दावा किया गया है कि यह रकम एक निजी फर्म को नियमों के विपरीत टेंडर दिलाने के एवज में दी गई थी। मामले के सामने आने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और उस समय हुई टेंडर प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। टेंडर प्रक्रिया को लेकर लगाए गंभीर आरोप राजेश देवांगन का आरोप है कि संबंधित टेंडर को एक खास फर्म ‘गणेश ट्रेडर्स’ के पक्ष में कराने के लिए पूरी योजना बनाई गई थी। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में तत्कालीन महापौर के करीबी माने जाने वाले मुकेश पाठक की भूमिका अहम रही।
कलेक्टर की कार्रवाई से बदला पूरा घटनाक्रम
शिकायत के अनुसार, रिश्वत की पूरी राशि मुकेश पाठक के माध्यम से तत्कालीन महापौर तक पहुंचाई गई। मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब तत्कालीन कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका के चलते उस पर रोक लगा दी। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद संबंधित टेंडर निरस्त हो गया। टेंडर रद्द होते ही रकम देने वाली फर्म ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू कर दिए, जिससे पूरे मामले में शामिल लोगों के बीच विवाद गहरा गया। पैसों के विवाद से खुलने लगी परतें बताया जा रहा है कि रकम लौटाने का दबाव बढ़ने के बाद आपसी विवाद सामने आ गया। इसी दौरान पूरे घटनाक्रम की जानकारी सार्वजनिक होने लगी और मामला पुलिस तक पहुंच गया। इस विवाद ने लेन-देन के पूरे नेटवर्क को उजागर कर दिया।वायरल वीडियो के बाद तेज हुई चर्चा
इस मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में राजेश देवांगन तौर पर पैसे के लेन-देन का जिक्र करते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस अधीक्षक को सौंपी शिकायत मामले में राजेश देवांगन ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब इस पूरे प्रकरण में पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह नगर निगम के चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में से एक साबित हो सकता है।