स्वस्थ रहने के लिए शरीर को सिर्फ विटामिन ही नहीं, बल्कि कई जरूरी मिनरल्स की भी आवश्यकता होती है। इनमें जिंक (Zinc) एक बेहद महत्वपूर्ण मिनरल है, जो शरीर के कई अहम कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में मदद करता है। अगर शरीर में जिंक की कमी होने लगे तो व्यक्ति को बार-बार थकान, कमजोरी, आलस, भूख कम लगना और रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार जिंक इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने, घाव भरने, कोशिकाओं के विकास, डीएनए निर्माण, प्रोटीन संश्लेषण और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इसकी कमी को नजरअंदाज करना कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।
जिंक की कमी के लक्षणों को हल्के में न लें
कई बार लोग संतुलित भोजन करने के बावजूद लगातार थकान और कमजोरी महसूस करते हैं, लेकिन इसकी असली वजह समझ नहीं पाते। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में शरीर में जिंक की कमी भी एक कारण हो सकती है। जिंक की कमी होने पर व्यक्ति बार-बार संक्रमण का शिकार हो सकता है, त्वचा पर मुंहासे निकल सकते हैं, बाल तेजी से झड़ सकते हैं और घाव भरने में सामान्य से अधिक समय लग सकता है। इसके अलावा स्वाद और गंध महसूस करने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। चूंकि शरीर स्वयं जिंक का निर्माण या भंडारण नहीं कर सकता, इसलिए इसकी नियमित पूर्ति भोजन या जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स के जरिए करनी पड़ती है।
शरीर में जिंक की क्या भूमिका होती है
अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के अनुसार जिंक एक आवश्यक मिनरल है, जो शरीर में 300 से अधिक एंजाइमों के कार्य में भाग लेता है। यह कोशिकाओं की मरम्मत, नई कोशिकाओं के निर्माण और कई जैविक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी होता है। चूंकि शरीर इसे लंबे समय तक स्टोर नहीं कर पाता, इसलिए रोजाना भोजन के माध्यम से इसकी पर्याप्त मात्रा लेना जरूरी माना जाता है। जिंक की कमी लंबे समय तक बनी रहे तो इसका असर शरीर के कई अंगों और कार्यों पर पड़ सकता है।

इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मददगार
जिंक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। यह श्वेत रक्त कोशिकाओं (White Blood Cells) के कार्य को बेहतर बनाता है, जो बैक्टीरिया, वायरस और अन्य संक्रमणों से लड़ने का काम करती हैं। जब शरीर किसी संक्रमण की चपेट में आता है, तब यही कोशिकाएं सक्रिय होकर रोगों से सुरक्षा प्रदान करती हैं। एनसीबीआई (NCBI) में प्रकाशित शोध के अनुसार, जिंक की कमी होने पर इम्यून प्रतिक्रिया कमजोर पड़ सकती है, जिससे व्यक्ति को बार-बार संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करता है
जिंक त्वचा की मरम्मत और नए टिश्यू बनने की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि कई एंटीसेप्टिक और घाव भरने वाली क्रीम में जिंक का उपयोग किया जाता है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, यदि शरीर में पर्याप्त जिंक मौजूद हो तो चोट या घाव अपेक्षाकृत जल्दी भर सकते हैं। वहीं इसकी कमी होने पर घाव ठीक होने में अधिक समय लग सकता है और संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है
डीएनए और प्रोटीन निर्माण में जरूरी
जिंक डीएनए सिंथेसिस, कोशिका विभाजन और प्रोटीन निर्माण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक होता है। यही वजह है कि बच्चों और किशोरों की शारीरिक वृद्धि एवं विकास में इसकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। गर्भावस्था के दौरान भी जिंक भ्रूण के विकास में सहयोग करता है। यदि लंबे समय तक इसकी कमी बनी रहे तो बच्चों की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है।
एनसीबीआई के कई अध्ययनों में पाया गया है कि पर्याप्त मात्रा में जिंक का सेवन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाता है। इससे शरीर संक्रमणों से अधिक प्रभावी तरीके से लड़ पाता है और बीमार पड़ने की संभावना कम हो सकती है। यही कारण है कि संतुलित आहार में जिंक युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करने की सलाह दी जाती है।
बार-बार होने वाले सर्दी-जुकाम में लाभदायक
कुछ वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि यदि सर्दी-जुकाम की शुरुआत में ही डॉक्टर की सलाह के अनुसार जिंक सप्लीमेंट लिया जाए, तो बीमारी की अवधि कम हो सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति बिना सलाह के जिंक की गोलियां लेना शुरू कर दे। किसी भी सप्लीमेंट का सेवन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह पर ही करना चाहिए।
त्वचा को स्वस्थ रखने में मददगार
जिंक त्वचा की कोशिकाओं की मरम्मत करने, सूजन कम करने और स्किन को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। यही वजह है कि मुंहासे (Acne) और कुछ अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं के इलाज में भी जिंक का उपयोग किया जाता है। पर्याप्त मात्रा में जिंक मिलने से त्वचा की प्राकृतिक हीलिंग प्रक्रिया बेहतर होती है।
आंखों की सेहत के लिए भी जरूरी
उम्र बढ़ने के साथ आंखों से जुड़ी कई समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि जिंक आंखों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट सिस्टम को सपोर्ट करता है और उम्र से संबंधित कुछ आंखों की बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि यह किसी बीमारी का इलाज नहीं है, बल्कि आंखों की सामान्य कार्यप्रणाली को बनाए रखने में सहायक माना जाता है। एनसीबीआई के अनुसार जिंक पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के उत्पादन और शुक्राणुओं (Sperm) की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। यदि शरीर में लंबे समय तक जिंक की कमी बनी रहे तो इसका असर पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
किन लोगों को जिंक सप्लीमेंट की जरूरत पड़ सकती है
हालांकि किसी भी प्रकार के जिंक सप्लीमेंट का सेवन केवल डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए। हर व्यक्ति को जिंक सप्लीमेंट लेने की आवश्यकता नहीं होती। अधिकांश लोग संतुलित आहार से इसकी जरूरत पूरी कर सकते हैं। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर जिंक सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं।

इन लोगों को डॉक्टर जिंक सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं:
- जिन लोगों में जिंक की कमी की पुष्टि हो चुकी हो।
- बुजुर्ग, जिनमें पोषक तत्वों का अवशोषण कम हो जाता है।
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं।
- क्रोहन डिजीज (Crohn's Disease) जैसे पाचन संबंधी रोगों से पीड़ित मरीज।
- ऐसे शाकाहारी लोग जिनके भोजन में जिंक की मात्रा कम होती है।
- बार-बार संक्रमण या कमजोर इम्यूनिटी से परेशान व्यक्ति।
जिंक के प्रमुख फूड सोर्स
यदि आप प्राकृतिक तरीके से जिंक की पूर्ति करना चाहते हैं तो अपने आहार में जिंक से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार संतुलित डाइट के जरिए अधिकांश लोगों की जिंक की जरूरत पूरी हो सकती है।
नॉन-वेज स्रोत
- चिकन,रेड मीट,अंडे,मछली,सी-फूड
शाकाहारी स्रोत
- कद्दू के बीज,तिल,चना,राजमा,मसूर दाल,काजू,बादाम,ओट्स,साबुत अनाज
जिंक सप्लीमेंट लेने से पहले रखें सावधानी
यदि आपको जिंक की कमी के लक्षण महसूस हो रहे हैं तो सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लें और जरूरत पड़ने पर जांच कराएं। बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक जिंक सप्लीमेंट लेना नुकसानदायक हो सकता है। अधिक मात्रा में जिंक लेने से मतली, उल्टी, पेट दर्द, दस्त और शरीर में कॉपर (Copper) की कमी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए जिंक की पूर्ति का सबसे सुरक्षित तरीका संतुलित और पौष्टिक आहार है, जबकि सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल केवल विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।