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Mamta Kaivart  Success Story ( Image Source - PRO )
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Lakhpati Didi: ममता कैवर्त ने सिलाई-कढ़ाई और फैंसी स्टोर से बदली परिवार की तस्वीर

Lakhpati Didi: महासमुंद जिले के ग्राम गढ़पटनी की ममता कैवर्त ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई और फैंसी स्टोर संचालन को रोजगार का माध्यम बनाया। समूह के सहयोग और प्रशिक्षण से उनकी परिवार की वार्षिक आय 97 हजार रुपये से बढ़कर 2 लाख 24 हजार 500 रूपए तक पहुंच गई।

प्रकाशित: 24 Sep 2026, 05:26 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Lakhpati Didi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक सेवा के 25 वर्षों की यात्रा का एक महत्वपूर्ण आयाम समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना रहा है। इसी संकल्प को धरातल पर साकार करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आज स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। 
महासमुंद जिले के बसना विकासखंड के ग्राम गढ़पटनी की ममता कैवर्त ऐसी ही महिला हैं, जिन्होंने स्व-सहायता समूह से जुड़कर सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण एवं फैंसी स्टोर संचालन को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया और परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम थी, जिसे  2 लाख 24 हजार 500 रूपए तक पहुंचाया।

बिहान योजना से बदली ममता की जिंदगी

ग्राम गढ़पटनी की ममता कैवर्त सामान्य गृहिणी के रूप में परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही थीं। समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की वार्षिक आय लगभग 97 हजार रूपए थी। सीमित आय के कारण परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। वर्ष 2022 में बिहान योजना के अंतर्गत ग्राम में चक्र के दौरान पहुंची सीआरपी दीदियों ने ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूह की अवधारणा, समूह के माध्यम से मिलने वाले प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विभिन्न विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। इससे प्रेरित होकर गांव की 10 महिलाओं ने जयश्री राम महिला स्व-सहायता समूह का गठन किया। ममता कैवर्त भी इस समूह से जुड़ीं और समूह की सचिव की जिम्मेदारी संभाली। जयश्री राम महिला स्व-सहायता समूह में कुल 10 सदस्य हैं। समूह को आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आरएफ के रूप में 15 हजार रूपए, सीआईएफ के रूप में 60 हजार रूपए तथा बैंक लिंकेज के माध्यम से प्रथम डोज 1 लाख 50 हजार रूपए और द्वितीय डोज 3 लाख रूपए की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।

फैंसी स्टोर से मिली नई पहचान
समूह की महिलाओं ने उपलब्ध संसाधनों का उपयोग आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ाने में किया। समूह स्तर पर गतिविधियां संचालित करने के साथ-साथ सदस्यों ने व्यक्तिगत आजीविका गतिविधियों को भी अपनाया। ममता कैवर्त ने सिलाई-कढ़ाई कार्य का प्रशिक्षण प्राप्त कर इसे रोजगार से जोड़ा और इसके साथ फैंसी स्टोर का संचालन शुरू किया। सिलाई-कढ़ाई के प्रशिक्षण ने ममता कैवर्त को अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने का अवसर दिया। अब वे सिलाई-कढ़ाई से संबंधित कार्य करने के साथ फैंसी स्टोर का संचालन भी कर रही हैं। इससे उन्हें घर के नजदीक ही नियमित आय का जरिया मिला है। ममता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिला, साथ ही अपने निर्णय स्वयं लेने और आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी मिला।

ममता की सालाना आय पहुंची 2.24 लाख

समूह के सहयोग, प्रशिक्षण और वित्तीय संसाधनों ने उनके लिए आगे बढ़ने की राह आसान की। ममता बताती है कि समूह से जुड़ने के बाद कृषि एवं अन्य गतिविधियों से लगभग 99 हजार 500 रूपए तथा सिलाई-कढ़ाई और फैंसी स्टोर संचालन से लगभग 1 लाख 25 हजार रूपए की आय प्राप्त होने लगी। इस प्रकार परिवार की कुल वार्षिक आय बढ़कर लगभग 2 लाख 24 हजार 500 रूपए हो गई। आय में वृद्धि से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, दैनिक जरूरतों और परिवार के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में उन्हें मदद मिल रही है। ममता कैवर्त अब स्वयं को पहले की अपेक्षा अधिक आत्मनिर्भर और सक्षम महसूस करती हैं।
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