प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बड़ा एक्शन लिया है। इस बार ED के रडार पर भारतमाला परियोजना (रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर) में हुआ करोड़ों रुपये का मुआवजा घोटाला है। जांच एजेंसी की टीमों ने आज सुबह-सुबह रिटायर्ड IAS अधिकारी जेके ध्रुव के भिलाई स्थित आवास सहित कुल तीन ठिकानों पर एक साथ छापा मारा।
बता दें कि रिटायर्ड IAS जेके ध्रुव पहले से ही बहुचर्चित CG-PSC भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक हैं और फिलहाल जेल में बंद हैं। जेल में रहते हुए अब भारतमाला घोटाले में उनका कनेक्शन सामने आने के बाद ED की इस कार्रवाई से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
सुबह 6 बजे गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंची ED
मिली जानकारी के अनुसार, करीब 6 गाड़ियों में सवार होकर ED के आला अफसरों और सुरक्षाबलों की टीम सुबह ठीक 6 बजे जेके ध्रुव के भिलाई निवास पर पहुंची। अचानक हुई इस दबिश से आसपास के इलाके में सनसनी फैल गई। फिलहाल ED के अधिकारी घर के भीतर मौजूद सदस्यों से पूछताछ कर रहे हैं और डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों व जमीन से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है।
ससुर-दामाद के सिंडिकेट पर भी कस रहा शिकंजा
भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर भुगतान घोटाले में हरमीत सिंह खनूजा को मुख्य आरोपी और जमीन दलाल माना गया है। जांच में सामने आया है कि हरमीत खनूजा ने तहसीलदार रविंदर कौर से शादी की थी, जो हरमीत सिंह चावला की बेटी हैं।
ED की जांच में खुलासा: आरोपी के ससुर हरमीत सिंह चावला के पास से इस महाघोटाले के पैसों के लेनदेन (मनी ट्रेल) और कई बेहद संवेदनशील जानकारियां मिली हैं। फिलहाल ED की टीमें डिजिटल सबूतों और लॉकरों को खंगालने में जुटी हैं।
जानिए कैसे हुआ ₹43 करोड़ का 'भारतमाला घोटाला'?
भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान राजस्व अधिकारियों और भू-माफियाओं ने मिलकर एक बड़ा सिंडिकेट चलाया। इस सिंडिकेट ने सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए अनोखा पैंतरा आजमाया:
जमीन के टुकड़े किए, 80 नए नाम जोड़े: अभनपुर क्षेत्र के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर जमीनों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरों में बांट दिया।
₹29 करोड़ की जमीन को किया ₹70 करोड़: नियमों को ताक पर रखकर बैक-डेट (पुरानी तारीखों) में दस्तावेज तैयार किए गए और मुआवजे की लिस्ट में अचानक 80 नए नाम जोड़ दिए गए। इसके चलते जिस जमीन का असल मुआवजा करीब 29.5 करोड़ रुपये होना था, उसकी कीमत कागजों पर बढ़ाकर 70 करोड़ रुपये से अधिक कर दी गई।
करोड़ों का भुगतान रोका: अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर की सड़क के लिए कुल 324 करोड़ रुपये का मुआवजा तय था। इसमें से 246 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था, लेकिन गड़बड़ी सामने आने के बाद 78 करोड़ रुपये के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।
दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद गिरे थे अफसरों के विकेट
इस घोटाले की परतें खुलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई हुई थी। दैनिक भास्कर डिजिटल में खबर प्रमुखता से छपने के बाद:
कोरबा के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे को सस्पेंड किया गया।
जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को भी निलंबित किया गया। इन अधिकारियों पर जांच रिपोर्ट तैयार होने के 6 महीने बाद गाज गिरी थी। निर्भय कुमार साहू समेत 5 अधिकारी-कर्मचारियों पर सीधे तौर पर 43 करोड़ 18 लाख रुपये से अधिक की हेराफेरी का आरोप है।
क्या है भारतमाला परियोजना?
यह केंद्र सरकार की एक बेहद महत्वाकांक्षी और देश की सबसे बड़ी सड़क परियोजना है। इसके तहत देशभर में करीब 26,000 किलोमीटर लंबे इकोनॉमिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। ये कॉरिडोर 'गोल्डन क्वाड्रिलेटरल' (स्वर्ण चतुर्भुज) और नॉर्थ-南北-ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को आपस में जोड़ेंगे, ताकि देश के भारी माल ढुलाई (फ्रेट ट्रैफिक) को रफ्तार दी जा सके। छत्तीसगढ़ से गुजरने वाला रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर इसी मेगा प्रोजेक्ट का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।
CGPSC घोटाले में भी फंसा है IAS ध्रुव का नाम
रिटायर्ड IAS जेके ध्रुव का नाम केवल भारतमाला तक सीमित नहीं है, वे छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित CGPSC (छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग) भर्ती घोटाले के भी प्रमुख चेहरा हैं।
क्या है CGPSC घोटाला?
यह मामला साल 2020 से 2022 के बीच आयोजित हुई पीएससी परीक्षाओं और इंटरव्यू से जुड़ा है। आरोप है कि योग्य और होनहार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर, नियमों को ताक पर रखकर राजनेताओं, रसूखदारों और आला अधिकारियों के बच्चों व रिश्तेदारों को सीधे डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे उच्च पदों पर रेवड़ियों की तरह नौकरियां बांटी गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच CBI को सौंपी थी।
पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने पत्नी के NGO के जरिए ली ₹45 लाख रिश्वत!
CBI की जांच में बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
सोनवानी का पारिवारिक सिंडिकेट: आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग कर अपने भतीजों को डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी बनवाया।
रिश्वत का 'CSR' मॉडल: जांच में पता चला कि एक निजी कंपनी ने सीएसआर (CSR) मद के तहत 45 लाख रुपये एक एनजीओ को डोनेट किए, जिसकी अध्यक्ष खुद सोनवानी की पत्नी थीं। इस रकम के बदले परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक किए गए।
पेपर लीक में अफसरों की मिलीभगत: आरोप है कि परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर ने चेयरमैन के इशारे पर उद्योगपति श्रवण गोयल को पेपर लीक किया। नतीजा यह हुआ कि उद्योगपति के बेटे और बहू, दोनों का चयन सीधे डिप्टी कलेक्टर के पद पर हो गया।
आंकड़ों में समझिए CGPSC 2021 का गणित
कुल पद: 171
प्री-एग्जाम (13 फरवरी 2022): 2,565 अभ्यर्थी पास हुए।
मेंस एग्जाम (मई 2022): 509 अभ्यर्थी इंटरव्यू तक पहुंचे।
फाइनल लिस्ट (11 मई 2023): 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी हुई, जिसके बाद भाई-भतीजावाद का यह बड़ा खुलासा हुआ।
अब ED इस बात की तफ्तीश कर रही है कि क्या CGPSC घोटाले के पैसों को भारतमाला परियोजना की जमीनों में खपाया गया था? आने वाले दिनों में जेल में बंद जेके ध्रुव और उनके करीबियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
