Latif Ghonghi: प्रख्यात हिंदी व्यंग्यकार लतीफ घोंघी की चुनिंदा 24 कालजयी रचनाएं अब छत्तीसगढ़ी भाषा में पाठकों के लिए उपलब्ध हैं। लेखक व अनुवादक विवेक कुमार रहाटगांवकर द्वारा अनुवादित इस नई पुस्तक 'एक कोरी चार' की समीक्षा करते हुए डॉ. ज्योति किरण चंद्राकर ने इसे छत्तीसगढ़ी साहित्य और लोक संस्कृति की दिशा में एक अहम पड़ाव बताया। छत्तीसगढ़ी बोली-भाखा में 'एक कोरी' का मतलब 20 होता है, और उसमें चार जोड़ने पर 24 की संख्या बनती है—जो सीधे तौर पर इस किताब में शामिल 24 पैने व्यंग्यों की ओर इशारा करती है।
अनुवाद में बचा रहा व्यंग्य का असल 'पंच'
साहित्यिक जगत में व्यंग्य का अनुवाद सबसे जटिल कामों में माना जाता है। व्यंग्य सिर्फ शब्दों की लिखावट नहीं, बल्कि समाज की विसंगतियों पर करारा प्रहार होता है। डॉ. चंद्राकर के मुताबिक, विवेक कुमार रहाटगांवकर ने मूल हिंदी रचनाओं की आत्मा को ठेठ छत्तीसगढ़ी मुहावरों, लोकोक्तियों और आंचलिक लहजे में इस खूबसूरती से ढाला है कि पाठक को कहीं भी अजनबीपन का एहसास नहीं होता। अनुवाद में छत्तीसगढ़ी भाषा की मिठास और ठेठ देसीपन पूरी तरह जीवंत हो उठा है।
मध्यवर्गीय जीवन और सामाजिक पाखंड पर करारी चोट
इस संग्रह में शामिल रचनाएं मानव स्वभाव के ढोंग, प्रशासनिक लालफीताशाही, बदलते सामाजिक मूल्यों और इंसानी लालच पर तीखा प्रहार करती हैं। इसमें मध्यवर्गीय जीवन के संघर्षों और तल्ख सच्चाइयों का बहुत ही सहज और सटीक चित्रण किया गया है। यह पुस्तक न केवल पाठकों को गुदगुदाती है, बल्कि हंसते-हंसते समाज के दोहरे चरित्र को भी बेनकाब करती है। छत्तीसगढ़ी साहित्य और व्यंग्य में रुचि रखने वालों के लिए यह किताब एक बेहतरीन संग्रहणीय दस्तावेज है, जो लोकभाषा और सामाजिक सरोकारों का शानदार संगम पेश करती है।