Leh Chalo March: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख की संस्कृति, प्रकृति और लोकतांत्रिक अधिकारों के संरक्षण के लिए एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने 19 सितंबर से 24 सितंबर के बीच लद्दाख में एक बड़े 'लेह चलो' पैदल मार्च (पदयात्रा) का ऐलान किया है। इस अभियान के लिए उन्होंने देश भर के लोगों से समर्थन की अपील की थी, जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने उन्हें अपना खुला समर्थन देने की घोषणा की है।
प्रदर्शन के लिए नहीं बातचीत करने आए थे
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने लोगों से लद्दाख के समर्थन में आगे आने का आह्वान किया है। दिल्ली स्थित जंतर-मंतर से जारी एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि वे दिल्ली किसी विरोध प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ बातचीत के सिलसिले में आए थे।
सरकार की ओर से कोई ठोस सहमति नहीं
करीब चार महीने के लंबे अंतराल के बाद लद्दाख के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच यह बैठक हुई थी। हालांकि, वांगचुक का कहना है कि वार्ता के बाद भी लद्दाख के भविष्य और प्रस्तावित लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर सरकार की ओर से कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है। उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि सरकार ने स्थानीय मांगों और स्वायत्तता को लेकर कोई लिखित ड्राफ्ट या औपचारिक आश्वासन पेश नहीं किया।
इंसाफ की लड़ाई का बनेगा प्रमुख केन्द्र
वांगचुक ने कहा, "लद्दाख हमेशा देश के साथ मजबूती से खड़ा रहा है, और अब वक्त आ गया है जब देश को लद्दाख को बचाने के लिए आगे आना होगा।" उन्होंने बताया कि अगर सरकार एक हफ्ते के भीतर कोई सकारात्मक आश्वासन देती है, तो इस पदयात्रा को लद्दाख के लिए जान देने वाले शहीदों की याद में एक उत्सव के रूप में निकाला जाएगा। अगर बातचीत में कोई प्रगति नहीं होती है, तो 19 सितंबर से शुरू होने वाला यह 5 दिवसीय मार्च लद्दाख के अधिकारों और इंसाफ की लड़ाई का प्रमुख केंद्र बनेगा।

