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भारत-UAE को जोड़ेगी 1,600 किमी अंडरसी पावर केबल
भारत-UAE को जोड़ेगी 1,600 किमी अंडरसी पावर केबल
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क्या अब समुद्र से आएगी रोशनी? भारत का बड़ा कदम

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच 1,600 किलोमीटर लंबी पावर केबल बिछाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ‘इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक’ के दौरान घोषणा की कि इस प्रोजेक्ट पर ₹40,000 करोड़ की लागत आने की उम्मीद है।

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प्रकाशित: 10 Jul 2026, 05:53 PM · अपडेट: 16 Jul 2026, 07:28 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

भारत और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के बीच एक बहुत बड़ा ऊर्जा प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया है कि दोनों देशों के बीच 1,600 किलोमीटर लंबी पावर केबल बिछाने का प्रस्ताव है। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 40,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। यह काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड मिशन का हिस्सा है।

गुजरात को UAE से जोड़ेगी केबल

यह पावर केबल अरब सागर के रास्ते गुजरात के भुज को सीधे UAE के तट से जोड़ेगी। यह केबल समुद्र की गहराई में 3,000 से 3,500 मीटर नीचे बिछाई जाएगी। इस खास तकनीक को हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट केबल कहा जाता है। सरकारी कंपनी पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करेगी। इसे बनने में लगभग 5 से 6 साल का समय लग सकता है। इस केबल के जरिए 2 गीगावाट बिजली का आदान-प्रदान हो सकेगा।

क्यों खास है यह प्रोजेक्ट

इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा बिजली का व्यापार करना होगा। अलग-अलग समय यानी टाइम ज़ोन होने के कारण इसका बहुत लाभ मिलेगा। जब भारत में रात होगी, तब खाड़ी देशों में दिन होगा, ऐसे में वहां से बिजली ली जा सकेगी। वहीं दिन के समय भारत अपनी अतिरिक्त सौर ऊर्जा या पवन ऊर्जा उन देशों को भेज सकेगा। इससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा की कमी पूरी होगी और व्यापारिक रिश्ते और भी मजबूत होंगे।

विस्तार की तैयारी में भारत

ऊर्जा मंत्री ने बताया कि भारत केवल UAE तक सीमित नहीं रहेगा। सऊदी अरब के साथ भी भारत ने 47,000 करोड़ रुपये का समझौता किया है। आने वाले समय में भारत का इरादा श्रीलंका, सिंगापुर और यूरोप तक अपने पावर ग्रिड को बढ़ाने का है। इसका मकसद पूरी दुनिया को एक बिजली नेटवर्क से जोड़ना है ताकि स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल हर जगह आसान हो सके।

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