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मौसमी बीमारियों से कैसे बचे
मौसमी बीमारियों से कैसे बचे
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मौसम का डबल अटैक : अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़, डॉक्टर बोले-खान-पान में लापरवाही पड़ेगी भारी

देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और उमस का असर लोगों की सेहत पर पड़ने लगा है। अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों की संख्या 30-40 फीसदी तक बढ़ गई है। डॉक्टरों के अनुसार पेट संक्रमण, फूड पॉइजनिंग, मलेरिया, डेंगू, वायरल फीवर, हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।

कीर्तिमान न्यूज
23 Jun 2026, 08:46 AM
नई दिल्ली

उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्से इस समय भीषण गर्मी और उमस भरी मौसमी मार झेल रहे हैं। सुबह की शुरुआत होते ही सूरज की तल्ख किरणें लोगों को झुलसाने लगती हैं, तो वहीं शाम होते-होते हवा में मौजूद उमस (Humidity) पसीने छुड़ा देती है। मौसम के इस बदलते और आक्रामक रुख का सीधा असर अब लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। स्थानीय अस्पतालों और क्लीनिकों की ओपीडी में अचानक मरीजों की तादाद 30 से 40 फीसदी तक बढ़ गई है।

मौसम में आए इस बदलाव, इससे होने वाली बीमारियों और खुद को सुरक्षित रखने के उपायों पर पेश है हमारे पोर्टल की यह विशेष ग्राउंड रिपोर्ट:

इन बीमारियों का बढ़ा सबसे ज्यादा खतरा

डॉक्टरों के मुताबिक, इस समय मुख्य रूप से तीन तरह की समस्याएं लोगों को सबसे ज्यादा अपनी चपेट में ले रही हैं:

  • पेट का इन्फेक्शन और फूड पॉइजनिंग: तेज गर्मी में बाहर का खाना बहुत जल्दी खराब होता है। दूषित पानी और बासी खाने की वजह से लोग उल्टी, दस्त और पेट दर्द का शिकार हो रहे हैं।

  • मलेरिया, डेंगू और वायरल फीवर: कुछ इलाकों में हो रही छिटपुट बारिश और उमस के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे मौसमी बुखार के मामले तेजी से ऊपर जा रहे हैं।

  • हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन: दोपहर के वक्त तेज धूप में निकलने वाले लोग सिरदर्द, चक्कर आने और शरीर में पानी की भारी कमी (डिहाइड्रेशन) की शिकायत लेकर डॉक्टरों के पास पहुँच रहे हैं।

बचाव ही इलाज है: क्या खाएं और क्या पिएं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में दवाओं से ज्यादा आपका सही खान-पान ही आपका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। अगर आप खुद को और अपने परिवार को बीमार होने से बचाना चाहते हैं, तो अपनी डाइट में ये बदलाव तुरंत करें:

1. पीने की आदतों में करें सुधार (हाइड्रेटेड रहें)

  • सिर्फ सादा पानी काफी नहीं: इस मौसम में पसीने के जरिए शरीर से जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं। इसलिए दिनभर में कम से कम 3-4 लीटर पानी पीने के साथ-साथ नींबू पानी, ओआरएस (ORS) का घोल, नारियल पानी और ताजी छाछ का सेवन जरूर करें।

  • पुदीने का शरबत: पुदीना पेट को अंदरूनी ठंडक देता है। दोपहर में पुदीने और कच्चे आम का पन्ना पीना लू से बचने का अचूक उपाय है।

  • बाजार के डिब्बाबंद जूस से दूरी: सड़कों पर बिकने वाले खुले जूस या बर्फ वाले गोलों से बचें, इनमें इस्तेमाल होने वाला पानी इन्फेक्शन का सबसे बड़ा कारण बनता है।

2. कैसा हो आपका भोजन? (हेल्दी और लाइट डाइट)

  • ताजा और हल्का खाना: इस मौसम में हमारा पाचन तंत्र (Digestive System) थोड़ा धीमा हो जाता है। इसलिए गरिष्ठ, ज्यादा तेल-मसालेदार और तला-भुना खाने से पूरी तरह परहेज करें। घर का बना सादा, ताजा और सुपाच्य भोजन ही करें।

  • पानी से भरपूर फल और सब्जियां: अपनी थाली में लौकी, तोरई, कद्दू, और खीरा-ककड़ी जैसी हरी सब्जियों को ज्यादा जगह दें। तरबूज और खरबूजा जैसे मौसमी फल शरीर में पानी का स्तर बनाए रखने में बेहद मददगार होते हैं।

  • बासी खाने को कहें 'ना': गर्मी में दो घंटे से ज्यादा बाहर रखा हुआ खाना बैक्टीरिया का घर बन जाता है। फ्रिज में रखे हुए खाने को भी अच्छी तरह गर्म करके ही खाएं, हालांकि कोशिश करें कि ताजा भोजन ही लें।

डॉक्टर की सीधी सलाह:

"दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बहुत जरूरी न हो तो धूप में निकलने से बचें। अगर निकलना ही पड़े, तो सिर को सूती कपड़े या छाते से ढकें और खाली पेट घर से बाहर न कदम रखें। बच्चों और बुजुर्गों के खान-पान पर इस मौसम में विशेष ध्यान देने की जरूरत है।"

नोट: यदि आपको या घर के किसी सदस्य को तेज बुखार, लगातार उल्टी या चक्कर आने की समस्या हो, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे वक्त जाया न करें और तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें। सतर्क रहें, स्वस्थ रहें!

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