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महिलाओं में एबनॉर्मल ब्लीडिंग
महिलाओं में एबनॉर्मल ब्लीडिंग
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रजोनिवृत्ति :  मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग है खतरे की घंटी, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

पीरियड्स के समय के अलावा होने वाली ब्लीडिंग को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना महिलाओं के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग, संबंध बनाने के बाद रक्तस्राव, अत्यधिक मासिक धर्म या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग जैसी स्थितियां कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकती हैं। खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद इस तरह के लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

कीर्तिमान नेटवर्क
01 Jun 2026, 02:35 PM
नई दिल्ली
महिलाओं के लिए मासिक धर्म (पीरियड्स) एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब बिना पीरियड्स के भी ब्लीडिंग होने लगे तो यह चिंता का विषय बन सकता है। कई बार महिलाएं इसे सामान्य हार्मोनल बदलाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह शरीर में किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। हार्मोनल असंतुलन, गर्भाशय से जुड़ी बीमारियां, संक्रमण, गर्भावस्था संबंधी जटिलताएं या कैंसर जैसी गंभीर स्थितियां भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकती हैं। ऐसे में समय रहते कारणों की पहचान और उचित चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।

एबनॉर्मल वजाइनल ब्लीडिंग

जब किसी महिला को सामान्य मासिक धर्म चक्र के अलावा ब्लीडिंग होती है, तो उसे एबनॉर्मल वजाइनल ब्लीडिंग कहा जाता है। इसमें दो पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग होना, अत्यधिक रक्तस्राव, संबंध बनाने के बाद ब्लीडिंग या मेनोपॉज के बाद रक्तस्राव शामिल है। यह समस्या हल्के स्पॉटिंग से लेकर भारी ब्लीडिंग तक हो सकती है।

हार्मोनल असंतुलन सबसे बड़ा कारण

महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करते हैं। जब इन हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ता है, तो गर्भाशय की आंतरिक परत प्रभावित होती है और अनियमित ब्लीडिंग शुरू हो सकती है। किशोरावस्था, प्री-मेनोपॉज और तनाव के दौरान हार्मोनल बदलाव अधिक देखने को मिलते हैं।

बीमारियों का संकेत

एबनॉर्मल ब्लीडिंग कई बार गर्भाशय में फाइब्रॉइड, पॉलीप्स, एंडोमेट्रियोसिस, पीसीओएस (PCOS), थायरॉयड विकार या संक्रमण जैसी समस्याओं का संकेत हो सकती है। कुछ मामलों में यह गर्भाशय, सर्विक्स या ओवरी से जुड़े कैंसर का शुरुआती लक्षण भी हो सकता है। इसलिए बार-बार होने वाली ब्लीडिंग की जांच कराना जरूरी है।

प्रेग्नेंसी में भी ब्लीडिंग

गर्भावस्था के दौरान हल्की ब्लीडिंग कुछ मामलों में सामान्य हो सकती है, लेकिन कई बार यह गर्भपात, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी या अन्य जटिलताओं का संकेत भी हो सकती है। ऐसे में किसी भी प्रकार की ब्लीडिंग होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

40 की उम्र के बाद है चिंता

डॉक्टरों के अनुसार 40 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं में हार्मोनल बदलाव तेजी से होते हैं। इस उम्र में एबनॉर्मल ब्लीडिंग गर्भाशय या सर्विक्स से जुड़ी गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती है। इसलिए इस आयु वर्ग की महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।

डॉक्टर से मिले 

यदि ब्लीडिंग बार-बार हो रही हो, अत्यधिक मात्रा में हो, चक्कर आ रहे हों, कमजोरी महसूस हो रही हो या मेनोपॉज के बाद रक्तस्राव हो रहा हो, तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

बचाव के तरीके

  • मासिक धर्म चक्र में किसी भी असामान्य बदलाव या ब्लीडिंग को नजरअंदाज न करें।
  • संतुलित आहार लें और शरीर में आयरन, विटामिन तथा आवश्यक पोषक तत्वों की कमी न होने दें।
  • नियमित रूप से स्त्री रोग विशेषज्ञ से स्वास्थ्य जांच कराएं, खासकर 40 वर्ष की उम्र के बाद।
  • तनाव को नियंत्रित रखने के लिए योग, ध्यान और पर्याप्त नींद को दिनचर्या में शामिल करें।
  • असुरक्षित यौन संबंधों से बचें और संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
  • हार्मोनल दवाओं या गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करें।
  • पीसीओएस, थायरॉयड या अन्य हार्मोनल समस्याओं का समय पर उपचार कराएं।
  • मेनोपॉज के बाद किसी भी प्रकार की ब्लीडिंग होने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें।
  • यदि ब्लीडिंग के साथ अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, पेट दर्द या भारी रक्तस्राव हो रहा हो तो तुरंत अस्पताल जाएं।
समय पर जांच, सही उपचार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर एबनॉर्मल वजाइनल ब्लीडिंग से जुड़ी गंभीर जटिलताओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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